-पर्यटन की राह तय होगी राज्य के विकास की मंजिल… अधिवक्ता चितरंजय
छत्तीसगढ़ सरकार ने बजट 2026-27 की थीम ‘संकल्प’ के साथ बजट को विकास के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए एक विजन डॉक्यूमेंट 2047 के रूप में परिभाषित किया है, जिसमें हमेशा की तरह सर्व समाज के विकास का संकल्प लिया गया है पर इसमें खास बात यह नजर आई कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 साल के सफर में पहली बार विष्णुदेव सरकार ने छत्तीसगढ़िया संस्कृति एवं विरासत को संजोकर पर्यटकों को लुभाने हेतु शक्ति पीठ कारीडोर के साथ ही छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों के विकास हेतु बजटीय प्रावधान किया गया है, जो स्वागतेय है ।
खासकर! जब छ ग़ में पचीस सालों में उद्योगों के नाम पर खनिज संपदाओं के सिर्फ दोहन पर काम किया गया है जिससे आम जन अपने जल_ जंगल_ जमीन पर हक के लिए लगातार संघर्षरत रहा है तथा विकास के नाम पर अब तक उनके हिस्से में धूल_धक्कड़ एवं पर्यावरण प्रदूषण रूपी जहर के अलावा कुछ भी नहीं है, उक्त बात कहते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग के जिलाध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि निश्चित रूप से सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़िया संस्कृति एवं धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बजट में प्रावधान कर छत्तीसगढ़िया अस्मिता को सम्मान प्रदान करने का महत्वपूर्ण प्रयास किया गया है। निश्चित रूप से औद्योगिक विकास के नाम पर वनों की अंधाधुंध कटाई, प्राकृतिक जलस्रोत में कारखानों से प्रवाहित अपशिष्ट से प्रदूषित होते जल से निजात मिलनेकर साथ हमारे प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों का सौंदर्य बढ़ेगा और पर्यटन की राह पर छत्तीसगढ़िया विकास की मंजिल तय होगी।









