= गैर शिक्षकीय कार्य में लगे शिक्षकों को कार्यमुक्त करने डीपीआई का आदेश =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। सुशासन सरकार में, एक और बड़ा एवं सही फैसला हुआ है। अब कामचोर और राजनीति के नाम पर रायता फैलाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की की गाज गिरेगी। जिन शिक्षकों को गैर शिक्षकीय कार्य में लगा दिया गया है, उन्हें कार्यमुक्त करने का आदेश शासन स्तर पर जारी हुआ है। यह आदेश शिक्षा व्यवस्था में सुशासन लाने में मददगार साबित होगा।
बस्तर जैसे क्षेत्र में इसलिए भी यह आदेश अहम है क्योंकि सरकार धुर नक्सल मुक्त जगरगुंडा को एजुकेशन हब बनाने में लगी है। शिक्षा विभाग में शैक्षणिक कार्यों पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न शिक्षकों और कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल संस्था में उपस्थिति देने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में डीपीआई ने सभी संयुक्त संचालकों, शिक्षा संभाग तथा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट आदेश भेजा है। जारी निर्देशों में कहा गया है कि शिक्षा विभाग में कार्यरत कई शिक्षक एवं कर्मचारी अपने मूल दायित्वों से हटकर अन्य कार्यालयों और संस्थानों में गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न हैं, जिससे स्कूलों में पठन-पाठन और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि शिक्षकों के नाम पर अपनी राजनीति चमकाने के लिए पचासों शिक्षक संगठन बनाकर उन संगठनों के सर्वेसर्वा बन बैठे हैं। ये शिक्षक नेता अपने स्कूलों से नदारद रहकर संगठन की गतिविधियों में मशगूल रहते हैं। वहीं प्रदेश भर में कामचोर प्रवित्ति के सैकड़ों शिक्षकों ने अपनी सुविधा के लिए खुद को ब्लॉक एवं जिला शिक्षा कार्यालयों तथा आश्रम, छात्रावासों में अटैच करवा लिया है। ऎसी प्रवृत्ति वाले ज्यादातर शिक्षक ब्लॉक व जिला मुख्यालयों में रहकर सुविधापूर्ण जीवन गुजार रहे हैं। उनकी मूल शालाएं या तो शिक्षक विहीन हो गईं हैं या फिर एक शिक्षकीय रह गई हैं। अगर विभाग के आदेश का ईमानदारी से पालन हुआ तो निश्चित ही शिक्षा विभाग में सुशासन आ जाएगा।










