होली के पर्व को लेकर इस बार तिथियों और मुहूर्त को लेकर कई लोगों में भ्रम बना हुआ था, लेकिन अब स्थिति साफ हो चुकी है। हिंदू परंपरा में होली से एक दिन पहले पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन भद्रा काल, विशेषकर भद्रा मुख के समय, नहीं किया जाता, इसलिए सही समय का ध्यान रखना जरूरी होता है।
होलिका दहन का शुभ समय
वर्ष 2026 में भद्रा काल 2 मार्च शाम 5:58 बजे से शुरू होकर 3 मार्च सुबह 5:30 बजे तक रहेगा।
भद्रा मुख का समय रात 2:38 बजे से सुबह 4:34 बजे तक बताया गया है, जो दहन के लिए अशुभ माना जाता है।
पूर्णिमा तिथि 3 मार्च शाम 5:27 बजे तक रहेगी, लेकिन इसी दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन 2 मार्च को भद्रा शुरू होने से पहले शुभ मुहूर्त में करना उचित रहेगा।
चंद्र ग्रहण और सूतक काल
3 मार्च को चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ग्रहण का समय दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक बताया गया है।
ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, इसलिए सूतक सुबह 6:23 बजे से प्रभावी रहेगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और पूजा-पाठ से परहेज किया जाता है।
रंगों वाली होली कब है
रंगों का उत्सव यानी रंगोत्सव 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर खुशियां बांटते हैं और भाईचारे व प्रेम का संदेश देते हैं। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की आस्था और होलिका के अंत की स्मृति से जुड़ा हुआ है।
कुल मिलाकर, इस बार होलिका दहन 2 मार्च को शुभ समय में करना बेहतर माना जा रहा है, जबकि रंगों वाली होली 4 मार्च को धूमधाम से मनाई जाएगी।









