मुंबई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर गुरुवार को मुंबई पहुंचे। यह दौरा 27 फरवरी से 2 मार्च तक चलेगा और इसे भारत-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद यह यात्रा रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुंबई से आर्थिक संवाद की शुरुआत
कार्नी ने अपने दौरे की शुरुआत देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से की। यहां वे शीर्ष उद्योगपतियों, प्रमुख सीईओ, वित्तीय विशेषज्ञों और कनाडाई पेंशन फंड के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करना है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति देने पर जोर रहेगा। कनाडा की ओर से पहले लगाए गए कुछ आरोपों के बाद पैदा हुए तनाव के बीच यह यात्रा संबंधों को व्यावहारिक दिशा देने का संकेत मानी जा रही है। कनाडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि यदि भारत की ओर से किसी प्रकार के हस्तक्षेप के ठोस प्रमाण होते, तो यह दौरा संभव नहीं होता।
2 मार्च को नई दिल्ली में मोदी से मुलाकात
प्रधानमंत्री कार्नी 1 मार्च को नई दिल्ली पहुंचेंगे और 2 मार्च को प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा लंबे समय से लंबित पड़े कम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर बातचीत को फिर से शुरू करना है।
इसके अलावा रक्षा, सुरक्षा सहयोग और आपसी व्यापार को दोगुना करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत दौरे के बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा पर रवाना होंगे। इसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कनाडा की सक्रिय रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत में बढ़ता कनाडाई निवेश
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत और कनाडा के बीच वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां सक्रिय हैं। भारत से कनाडा को दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पादों का प्रमुख निर्यात होता है।
कनाडा के बड़े पेंशन फंड भारत के रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में पहले से निवेश कर चुके हैं। अनुमान है कि कुल निवेश 100 अरब डॉलर से अधिक का है, जिसे आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और रणनीतिक संतुलन को नई दिशा दे सकता है।









