संवाददाता – निलेश सिंह
मस्तूरी (बिलासपुर)। बिलासपुर जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रिसदा में पिछले लगभग 40 वर्षों से होली पर्व के अवसर पर निःशुल्क आयुर्वेदिक मिर्गी दवा वितरण की अनूठी परंपरा निभाई जा रही है। यह सेवा चंदेल परिवार द्वारा निरंतर की जा रही है, जिसके कारण हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से हजारों मरीज यहां उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं।
होली से पूर्व आयोजित इस विशेष सेवा कार्यक्रम में मिर्गी (दौरा) रोग से पीड़ित लोगों को पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति से तैयार दवा निशुल्क प्रदान की जाती है। आयोजकों के अनुसार इस दवा को निर्धारित विधि से लगातार तीन वर्षों तक लेने की सलाह दी जाती है, जिससे रोगियों को लाभ मिलने की बात कही जाती है।
दूर-दराज से पहुंचते हैं मरीज
इस आयोजन की ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी है। छत्तीसगढ़ सहित मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज एवं उनके परिजन रिसदा गांव पहुंचते हैं। मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजन समिति द्वारा रहने और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था भी की जाती है।
सेवा और आस्था का अनूठा संगम
ग्रामीणों के सहयोग से संचालित यह आयोजन सेवा और आस्था का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह परंपरा बिना किसी शुल्क के समाजसेवा की भावना से निभाई जा रही है, जिससे जरूरतमंद मरीजों को राहत मिलती है।
सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं
हर वर्ष बढ़ती संख्या को देखते हुए आयोजन स्थल पर मरीजों की पंजीयन व्यवस्था, दवा वितरण और ठहरने की सुविधाओं को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता है, ताकि दूर से आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
ग्रामीणों और आयोजकों ने बताया कि यह परंपरा आगे भी निरंतर जारी रहेगी और जरूरतमंद लोगों की सेवा का यह सिलसिला भविष्य में भी इसी तरह चलता रहेगा।









