केशकाल संवाददाता – विनीत पिल्लई
कोंडागाँव, छत्तीसगढ़
दिनांक: 2 मार्च, 2026
शासकीय हाई स्कूल – हात्मा (विकास खण्ड – बड़ेराजपुर) के प्रांगण में आज विज्ञान की एक अनूठी झलक देखने को मिली। स्कूल के छात्रों ने कबाड़ से जुगाड़ और वैज्ञानिक सिद्धांतों का समन्वय करते हुए ‘वॉटर रॉकेट’ (Water Rocket) का सफल प्रक्षेपण किया।

कैसे हुआ धमाका?
विद्यार्थियों ने एक पुरानी प्लास्टिक की बोतल, पानी और साधारण वाटर पाइप का उपयोग कर इस रॉकेट को तैयार किया। जब पाइप के ज़रिए बोतल में हवा भरी गई, तो अंदर बने भारी वायुदाब (Air Pressure) ने पानी को तेज़ी से नीचे धकेला। न्यूटन के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) के अनुसार, यह रॉकेट आसमान की ऊंचाइयों को छूता हुआ निकल गया।
प्रायोगिक शिक्षा पर ज़ोर
इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य रटने की बजाय ‘करके सीखने’ (Learning by Doing) की पद्धति को बढ़ावा देना था। रॉकेट को हवा में उड़ता देख न केवल छात्र उत्साहित हुए, बल्कि उन्होंने एरोडायनामिक्स और ऊर्जा संरक्षण जैसे जटिल विषयों को भी आसानी से समझा।
”जब बच्चे अपनी आँखों के सामने विज्ञान को सच होते देखते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और जिज्ञासा कई गुना बढ़ जाती है।” — संदीप कुमार सेन, व्याख्याता हाई स्कूल हात्मा।
मुख्य आकर्षण:
हैंड्स-ऑन लर्निंग: छात्रों ने स्वयं रॉकेट की बॉडी और फिन्स तैयार किए।
टीम वर्क: हवा भरने से लेकर लॉन्च पैड संभालने तक, बच्चों ने बेहतरीन तालमेल दिखाया।
रोमांचक समापन: रॉकेट के उड़ते ही पूरा परिसर तालियों की गूँज से भर उठा।









