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छत्तीसगढ़ महिला सम्मान अभियान’ में श्रीमती बानी मुखर्जी की पहल को सराहना, जेल से लेकर समाज तक महिलाओं और बच्चों के जीवन में ला रहीं बदलाव

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अंबिकापुर।
महिलाओं के योगदान और उनकी उपलब्धियों को सामने लाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “news36garh महिला सम्मान अभियान” के तहत केंद्रीय जेल अंबिकापुर में पदस्थ कल्याण अधिकारी श्रीमती बानी मुखर्जी के सामाजिक कार्यों को विशेष रूप से सराहा जा रहा है। वर्ष 2008 से केंद्रीय जेल अंबिकापुर में कार्यरत श्रीमती मुखर्जी ने अपने दायित्वों से आगे बढ़कर महिला एवं बाल सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक न्याय और पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

केंद्रीय जेल में निरुद्ध लगभग 225 महिलाओं और 25 बच्चों के लिए उन्होंने नियमित स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कराया। गर्भवती महिला बंदियों के लिए विशेष स्वास्थ्य देखभाल और बच्चों के लिए आंगनवाड़ी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना उनके प्रयासों का ही परिणाम है। जेल में रहने वाली महिलाओं को सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य देने के लिए उन्होंने शिक्षा, परामर्श और कौशल विकास के कई कार्यक्रम शुरू किए।

श्रीमती बानी मुखर्जी की पहल से केंद्रीय जेल अंबिकापुर में इग्नू अध्ययन केंद्र की स्थापना भी हुई, जिससे कई महिलाओं को साक्षरता और उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उनके प्रयासों से अब तक 500 से अधिक महिलाओं को साक्षर बनाया गया, वहीं 12 महिलाओं ने स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके अलावा अनेक महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जेल के भीतर ही नहीं, बल्कि समाज में भी उन्होंने कई सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए। ग्रामीण क्षेत्रों में जादू-टोना, घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसी समस्याओं से पीड़ित महिलाओं को न्याय और सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने सक्रिय पहल की। उनके प्रयासों से 13 बाल विवाह रोके गए, 8 बालिकाओं को मानव तस्करी से बचाया गया और 130 गर्भवती ग्रामीण महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
इसके साथ ही उन्होंने समाज के उपेक्षित और वंचित वर्गों के लिए भी निरंतर कार्य किया। उनके प्रयासों से 55 सड़क बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया, जबकि 80 नशा-ग्रस्त बच्चों को पुनर्वास केंद्र तक पहुंचाया गया। अब तक उनके सामाजिक कार्यों से 1400 से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

श्रीमती बानी मुखर्जी का मानना है कि जेल में निरुद्ध महिलाएं केवल अपराधी नहीं बल्कि परिस्थितियों से संघर्ष कर रही संवेदनशील इंसान हैं। यदि उन्हें सही मार्गदर्शन, शिक्षा और अवसर मिले तो वे अपने जीवन को नई दिशा दे सकती हैं। इसी सोच के साथ वे लगातार महिलाओं और बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कार्य कर रही हैं।

“news36garh महिला सम्मान अभियान” के तहत श्रीमती बानी मुखर्जी जैसी समर्पित महिलाओं की कहानी समाज के लिए प्रेरणा बन रही है। उनका समर्पण, संवेदनशीलता और नेतृत्व महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

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