सुकमा संवाददाता – हारून रशीद
मिट्टी, कलम और सफ़र
किरंदुल…
जहाँ दुनिया अक्सर सिर्फ खदानें देखती है।
लेकिन सच यह है कि
यहीं से कभी-कभी एक कलम भी निकलती है।
24 मई 2023 को खबर आई थी —
“किरंदुल परियोजना की बेटी दिव्या भोपाल में महाकवि नीरज सम्मान से सम्मानित।”
और आज फिर एक खबर आई —
महिला दिवस पर राज्यपाल के हाथों सम्मान।
तीसरी आंख की नज़र में
यह दो खबरें नहीं हैं,
यह एक ही कहानी के दो पड़ाव हैं।
एक छोटा शहर,
एक जिद्दी कलम,
और एक ऐसा सफ़र
जो धीरे-धीरे स्थानीय से राष्ट्रीय बन रहा है।
क्योंकि सच यही है —
किरंदुल की मिट्टी
सिर्फ लोहा ही नहीं निकालती,
कभी-कभी वह ऐसी कलम भी गढ़ देती है
जो मंचों पर नहीं,
लोगों की यादों और समय के इतिहास में जगह बना लेती है।
और जब किसी छोटे शहर की एक कलम
बार-बार बड़े दरवाज़ों तक पहुँचती है,
तो यह सिर्फ सम्मान नहीं होता —
यह उस मिट्टी का ऐलान होता है
जिसे दुनिया ने अब तक सिर्फ खदान समझा था।
डॉ. दिव्या देशमुख ‘उन्मुखी’ जी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर ढेरों बधाइयाँ। आपकी लेखनी यूँ ही चमकती रहे!







