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13 साल से अनुकम्पा नियुक्ति के लिए संघर्ष: बेटी ने उठाई न्याय की आवाज, भ्रष्टाचार और अपमान का आरोप

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जगदलपुर (बस्तर):
बस्तर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और अनुकम्पा नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जगदलपुर के लालबाग निवासी सोनल मिश्रा पिछले 13 वर्षों से अपने पिता की अनुकम्पा नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है।
सोनल मिश्रा के पिता स्वर्गीय दिनेश मिश्रा स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया कार्यालय में कार्यरत थे। उनका निधन 18 मार्च 2013 को हो गया था। परिवार में कोई भाई नहीं होने के कारण बड़ी बेटी होने के नाते सोनल मिश्रा ने शासन के नियमों के तहत अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

परिवार का आरोप है कि आवेदन देने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पद रिक्त न होने की बात कहकर शिक्षा कर्मी के पद के लिए सहमति पत्र मांगा। सोनल मिश्रा ने सहमति पत्र भी दे दिया, लेकिन कथित तौर पर उनसे पैसे की मांग की गई। पैसे देने में असमर्थ होने पर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया।

 जांच में सामने आईं अनियमितताएँ

सोनल मिश्रा के अनुसार उन्होंने वर्ष 2021 में सूचना के अधिकार के तहत कई मामलों की जांच की मांग की थी। बाद में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को शिकायत करने के बाद जिला पंचायत जगदलपुर में तीन सदस्यीय समिति द्वारा जांच कराई गई।

जांच प्रतिवेदन में कुछ मामलों में अनुकम्पा नियुक्ति नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने का दावा किया गया है।
परिवार का आरोप है कि जिन लोगों को नियमों के विरुद्ध नियुक्ति दी गई, वे आज भी नौकरी कर रहे हैं, जबकि पात्र होने के बावजूद सोनल मिश्रा को नियुक्ति नहीं दी गई।

 कलेक्टर कार्यालय से लेकर जिला पंचायत तक भटकता रहा मामला

सोनल मिश्रा बताती हैं कि 17 फरवरी 2026 को वे अपनी माता के साथ कलेक्टर कार्यालय में आवेदन लेकर पहुंचीं। कलेक्टर ने मामले को अपर कलेक्टर को सौंपा, जिन्होंने आवेदन को जिला पंचायत जगदलपुर के सीईओ के पास भेज दिया।

इसके बाद 19 फरवरी 2026 को जब वे जिला पंचायत कार्यालय पहुंचीं और मिलने के लिए पर्ची भेजकर बाहर इंतजार कर रही थीं, तब उनके साथ कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किया गया।
परिवार का आरोप है कि सीईओ ने नाराजगी जताते हुए ऊंची आवाज में उन्हें फटकार लगाई और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि उन्हें अंदर न आने दिया जाए।

 अपमान से आहत हुईं 63 वर्षीय माता

सोनल मिश्रा की माता ने बताया कि इस घटना से उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा। उनका कहना है कि अपने 63 वर्षों के जीवन में उन्हें कभी इस तरह का अपमान नहीं सहना पड़ा।
उन्होंने कहा कि वे एक सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्रीय स्तर की साहित्यकार हैं और विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी हो चुकी हैं, लेकिन अपनी बेटी के न्याय के लिए आवाज उठाने पर उन्हें अपमानित होना पड़ा।

 न्याय की मांग

सोनल मिश्रा ने सरकार से निम्न मांगें की हैं:
अनुकम्पा नियुक्ति मामले में समयबद्ध अंतिम निर्णय लिया जाए
कथित गलत नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

19 फरवरी 2026 की घटना की जांच कर संबंधित अधिकारियों के आचरण की समीक्षा की जाए
सोनल मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 13 वर्ष केवल इस उम्मीद में गुजार दिए कि उन्हें उनके पिता की जगह नौकरी मिलेगी, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला।

 बड़ा सवाल
यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है—
क्या अनुकम्पा नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता है?
यदि जांच में अनियमितताएँ सामने आई हैं तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और क्या एक बेटी को अपने अधिकार के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़ेगा?
अब देखना होगा कि इस मामले में शासन और प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या सोनल मिश्रा को आखिरकार न्याय मिल पाता है

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