ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर (NCL) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसका असर आरक्षण से जुड़े कई मामलों पर पड़ सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगर परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक है, तो सामान्य स्थिति में ओबीसी नॉन क्रीमी लेयर का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि आय की गणना को लेकर कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिए हैं।
किस आय को माना जाएगा और किसे नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि माता-पिता यदि सरकारी सेवा में ग्रुप-III या ग्रुप-IV श्रेणी में कार्यरत हैं, तो उनकी सैलरी को सीधे तौर पर क्रीमी लेयर की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी तरह कृषि आय को भी इस सीमा में नहीं जोड़ा जाएगा।
कोर्ट के अनुसार नॉन क्रीमी लेयर तय करते समय केवल अन्य स्रोतों जैसे व्यापार, संपत्ति या निवेश से होने वाली आय को ध्यान में रखा जाएगा। इन स्रोतों से परिवार की औसत आय लगातार तीन वर्षों तक 8 लाख रुपये सालाना से कम होनी चाहिए।
पुराने निर्देश का एक हिस्सा अमान्य
सर्वोच्च अदालत ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के 2004 के पत्र के पैरा-9 को अब प्रभावहीन माना है। कोर्ट ने कहा कि निजी क्षेत्र या बैंक में काम करने वाले लोगों की केवल सैलरी के आधार पर उन्हें क्रीमी लेयर में शामिल नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पहले सरकारी पदों के समकक्षता (equivalence) तय की जाएगी, तब ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जब तक नया स्पष्ट ढांचा तय नहीं होता, तब तक 1993 का मूल कार्यालय ज्ञापन लागू रहेगा।
कई लोगों को मिल सकता है लाभ
इस फैसले से उन उम्मीदवारों को राहत मिलने की संभावना है, जिन्हें पहले क्रीमी लेयर की गलत व्याख्या के कारण ओबीसी आरक्षण से वंचित कर दिया गया था। अदालत ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर पुराने मामलों की भी समीक्षा की जा सकती है और यह फैसला पिछली तिथि से लागू किया जा सकता है।
साथ ही, केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को इस फैसले को लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। आवश्यक होने पर अतिरिक्त पद भी बनाए जा सकते हैं, ताकि अन्य कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित न हो।
ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण
देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि इसका लाभ केवल नॉन क्रीमी लेयर वर्ग के उम्मीदवारों को ही मिलता है। इसी वजह से क्रीमी और नॉन क्रीमी लेयर की परिभाषा और आय सीमा को लेकर समय-समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।







