-बागबाहरा के एम.के. बाहरा गांव की महिलाओं ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल, प्रतिमाह 90 हजार तक की आय
अब्दुल रफ़ीक खान/महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महिला सशक्तीकरण की एक नई इबारत लिखी जा रही है। जिले के बागबाहरा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम एम.के. बाहरा में ‘जय माँ लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह’ की महिलाओं ने तकनीक और मेहनत के संगम से आर्थिक आजादी की राह चुन ली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के सहयोग से इस समूह ने जिले का पहला आधुनिक ‘एयर कंडीशनर (AC) पोल्ट्री फार्म’ स्थापित किया है, जिससे उनकी किस्मत बदल गई है।
मजदूरी से उद्यमी बनने का सफर
समूह की अध्यक्ष युगेश्वरी साहू बताती हैं कि एक समय था जब समूह की महिलाएं पूरी तरह से खेती और मजदूरी पर निर्भर थीं। आय के साधन सीमित होने के कारण परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था। लेकिन ‘बिहान’ योजना से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक मदद मिली, बल्कि आत्मविश्वास भी मिला।
शुरुआत मात्र 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि से हुई थी, जिसे महिलाओं ने अपनी सूझबूझ से बढ़ाते हुए सामुदायिक निवेश निधि (CIF) और बैंक लिंकेज के माध्यम से लाखों के टर्नओवर में बदल दिया। व्यवसाय की सफलता को देखते हुए समूह ने 10 लाख रुपये का ऋण लेकर इस अत्याधुनिक AC पोल्ट्री फार्म की नींव रखी।
हाई-टेक फार्म: 10,000 चूजों की क्षमता
इस आधुनिक पोल्ट्री फार्म की सबसे खास बात इसकी एयर कंडीशनर प्रणाली है, जो चूजों को मौसम के उतार-चढ़ाव से बचाती है और मृत्यु दर को कम करती है।
•क्षमता: लगभग 10,000 चूजे।
•आय: प्रति माह 80 से 90 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ।
•मार्गदर्शन: समूह के इस सफर में अध्यक्ष के पति सुरेश साहू का तकनीकी मार्गदर्शन भी सराहनीय रहा।
प्रशासनिक सराहना
इस इकाई का विधिवत शुभारंभ जिला स्काउट गाइड के अध्यक्ष एतराम साहू और जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार द्वारा किया गया। अधिकारियों ने समूह के इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए इसे जिले के अन्य समूहों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बताया है।
बदल रही है सामाजिक और आर्थिक तस्वीर
आज इस आय से समूह की महिलाएं न केवल अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं दे पा रही हैं, बल्कि समाज में उनकी पहचान ‘लखपति दीदी’ के रूप में उभर रही है। समूह की अन्य सदस्य अब भविष्य में इस यूनिट को और विस्तार देने की योजना बना रही हैं।







