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CG-“TET परीक्षा किसी सूरत में मंजूर नहीं” शिक्षक संगठनों की बैठक में बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ में भी अप्रैल महीने में जोरदार प्रदर्शन..

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संवाददाता – विनीत पिल्लई
छत्तीसगढ़ में टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर शिक्षक संगठनों ने बड़ा विरोध दर्ज किया है। रायपुर में हुई बैठक में संगठनों ने कहा कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे पर दिल्ली सहित प्रदेश में बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
रायपुर, 15 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर रविवार को राजधानी रायपुर में राज्य के विभिन्न शिक्षक संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में Teachers Federation of India के उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, केदार जैन और  शिक्षक नेता रविंद्र राठौर ने शिक्षक संगठनों को फेडरेशन के रुख से अवगत कराया। इस दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी और सर्वसम्मति से कई अहम निर्णय लिए। आपको बता दें कि इन तीनों नेताओं ने दिल्ली में आयोजित हुई बैठक में भी छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था।
 
आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से छूट की मांग
बैठक में शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट कहा कि Right to Education Act (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों पर किसी भी प्रकार की विभागीय परीक्षा या सामान्य परीक्षा लागू नहीं की जानी चाहिए। संगठनों का तर्क है कि उस समय नियुक्ति की शर्तों में ऐसी किसी परीक्षा का प्रावधान नहीं था, इसलिए बाद में नियम बदलकर उन्हें परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।शिक्षक नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। उनका कहना है कि यदि सरकार इस मामले में सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं होंगे शिक्षक
बैठक के दौरान शिक्षक नेताओं ने स्पष्ट घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त कोई भी शिक्षक किसी भी प्रकार की परीक्षा में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी शिक्षक संगठनों की सहमति से लिया गया है और इस मुद्दे पर सभी संगठन एकजुट हैं।शिक्षक संगठनों के मुताबिक, लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक परीक्षा का दबाव डालना उनके साथ अन्याय है। इसलिए वे इस फैसले के खिलाफ संगठित रूप से विरोध करेंगे।
दिल्ली में होगा बड़ा प्रदर्शन
बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति पर भी चर्चा की गई। तय किया गया कि अगले महीने दिल्ली में होने वाले बड़े प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होंगे।इसके लिए 4 अप्रैल को छत्तीसगढ़ से शिक्षकों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल दिल्ली के लिए रवाना होगा। वहां देशभर के शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदेश में भी होगा आंदोलन
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि दिल्ली से लौटने के बाद छत्तीसगढ़ में भी इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अप्रैल महीने के दूसरे या तीसरे सप्ताह में प्रदेश स्तर पर जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक भाग लेंगे।शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
कई शिक्षक संगठनों ने लिया हिस्सा
रायपुर में आयोजित इस बैठक में राज्य के 10 से अधिक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि वे आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संयुक्त रूप से संघर्ष करेंगे।शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह केवल एक संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए इस मुद्दे पर सभी संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन करने का फैसला लिया है। बैठक के दौरान Teachers Federation of India के उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, केदार जैन के अलावे रविन्द्र राठौर, रामचंद्र सोनवंशी,जाकेश साहू, प्रदीप पांडे, कमलेश बिसेन, विष्णु प्रसाद साहू, ममता खालसा,, बसंत कौशिक उपस्थित थे।

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