बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
प्रधानमंत्री का सपना है कि हर गरीब परिवार को पक्के मकान की सुविधा मिले। लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत और विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पचवाल का है, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी अनियमितता का आरोप सामने आया है। आरोप है कि गांव में कई ऐसे हितग्राही हैं जिन्हें एक भी आवास नहीं मिला, जबकि कुछ परिवारों को नियमों के विरुद्ध डबल-डबल आवास स्वीकृत कर दिया गया।
आनंद नेताम एसडीएम रामानुजगंज
पूर्व सरपंच द्वारा इस मामले की लिखित शिकायत जनपद पंचायत में की गई थी। शिकायत के बाद जनपद के अधिकारियों ने जांच टीम गठित कर गांव में जांच के लिए भेजा। जांच करने पहुंचे अधिकारी भी यह देखकर हैरान रह गए कि एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर दिया गया और राशि भी निकाल ली गई।
इतना ही नहीं, पंचायत में एक और गंभीर मामला सामने आया है। बजनाथ पंडो नाम के हितग्राही के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था, लेकिन उनकी और उनकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद उनके परिवार के खाते में राशि डालने के बजाय किसी अन्य रिश्ते दार व्यक्ति के खाते में पैसा डालकर निकाल लिया गया।
निरंजन (आवास लाभार्थी)
जब इस मामले में बजनाथ पंडो के पोते से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें तो इस आवास के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर उनके दादा के नाम से आवास स्वीकृत हुआ है तो उन्हें उसका पैसा दिया जाए ताकि वे मकान बनाकर रह सकें।
वहीं गांव के ही एक अन्य हितग्राही निरंजन का कहना है कि उनके नाम से उसकी पत्नी के नाम से एक-एक कुल दो प्रधानमंत्री आवास आया था और उसकी राशि भी निकल चुकी है। लेकिन उनकी पत्नी के नाम से स्वीकृत आवास की राशि अब तक एक ही किस्त निकाली गयी है और दूसरी किस्त किसी अन्य खाते में डाली जा रही है, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
ग्राम पंचायत के सरपंच के पुत्र ने भी स्वीकार किया कि पंचायत में कई ऐसे मामले हैं जहां एक ही परिवार को दो-दो आवास मिल गए हैं और कुछ लोग उसकी राशि भी निकाल चुके हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब प्रधानमंत्री आवास योजना की निगरानी के लिए आवास मित्र, रोजगार सहायक और पंचायत स्तर पर कई जिम्मेदार लोग नियुक्त हैं, तो इतनी बड़ी अनियमितता आखिर कैसे हो गई। पंचायत में रोजगार सहायक और आवास मित्र पर फर्जी मास्टर रोल बनाकर बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने के भी आरोप लगे हैं। इसकी शिकायत भी जनपद पंचायत के सीईओ से की गई है।
हालांकि जांच टीम गांव पहुंचकर अपनी जांच पूरी कर चुकी है और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया ।







