कोरबा संवाददाता – हेमचंद सोनी
आए दिन विवादों से घी रहती है कोयला खदान में काम करने वाली निजी कंपनी कालिंगा
दीपका खदान एसईसीएल में ड्राइवर जीवराखन जांगड़े की ऑन ड्यूटी हार्ट अटैक से दुखद मौत 7 घंटे कलिंगा कंपनी का काम बंद
एसईसीएल की दीपका क्षेत्र की कोयला खदान में निजी कंपनी कलिंगा कॉरपोरेशन के ड्राइवर श्री जीवराखन जांगड़े की ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आने से मौत हो गई। घटना के बाद श्रमिकों ने तुरंत 7 घंटे तक काम बंद करा दिया, जिससे खदान क्षेत्र में आक्रोश फैल गया।
मृतक जीवराखन जांगड़े पिछले पांच वर्षों से कलिंगा कॉरपोरेशन में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे। मौत की सूचना मिलते ही ठेकेदार कंपनी और श्रमिकों के बीच तीखी नारेबाजी शुरू हो गई। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना गैर-राजनीतिक संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री उमा गोपाल ने मामले में परिवार के हित में ठेकेदार प्रबंधन से लंबी बातचीत की।

परिवार को मिला मुआवजा और राहत पैकेज लिखित आश्वासन सहित
क्रिया-कर्म के लिए तत्काल सहायता ₹3,50,000 साढ़े तीन लाख रुपये तुरंत दिए गए।
सभी ड्राइवरों एवं कर्मचारियों द्वारा 1 दिन का वेतन चंदा सभी की सहमति से निर्णय लिया गया, जिसकी अनुमानित राशि 15 से 16 लाख रुपये
कलिंगा कंपनी द्वारा इंश्योरेंस क्लेम लगभग 7 लाख रुपये
कुल राहत राशि26 से 27 लाख रुपये लगभग
नौकरी मृतक के परिवार के एक सदस्य को कलिंगा कंपनी में नौकरी दी जाएगी।
बच्चों की शिक्षा जीवराखन जांगड़े के बच्चों का पूरा शिक्षा खर्च कलिंगा कंपनी उठाएगी लिखित आश्वासन दिया गया
इन शर्तों पर समझौता होने के बाद 7 घंटे के काम बंद के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया और खदान में काम पुन शुरू कर दिया गया।

उमा गोपाल का बयान
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रदेश संगठन मंत्री उमा गोपाल ने कहा कि परिवार को तत्काल राहत, लिखित आश्वासन और उचित मुआवजा मिलने से श्रमिकों का आक्रोश शांत हुआ। उन्होंने मजदूर हितों की रक्षा के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।
यह लगातार दूसरी घटना है, जिसमें दीपका क्षेत्र में ठेका कर्मियों की मौत हुई है। इससे कोयला खदानों में स्वास्थ्य सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं और इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर सवाल उठ रहे हैं।
कलिंगा कंपनी की लापरवाही चरम सीमा पर
एसईसीएल दीपिका खदान में नियोजित कलिंगा कंपनी जब से आई है तब से विवादों के बीच गिरी रहती है इसके बावजूद कंपनी के ऊपर किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई कोल इंडिया प्रबंधन के द्वारा नहीं की गई है जिससे कंपनी के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं जिसका नुकसान वहां पर काम करने वाले भू स्थापित मजदूरों को आए दिन वेतन विसंगति और कार्य के दौरान अधिकारियों की तानाशाही से कर्मचारी व्यथित होकर भी रोजी-रोटी कमाने को मजबूर हैं
कलिंगा कंपनी के जीएम विकास दुबे कर्मचारियों के मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।







