बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
गोवर्धन पर्वत की गुफा में विराजे हैं भगवान कृष्ण
गुड़ी पड़वा पर उमड़ा आस्था का सैलाब
जगदलपुर। बस्तर संभाग धार्मिक और पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां कल-कल जरते बड़े झरने हैं, तो कई रहस्यमयी गुफाएं भी हैं। भगवान गणेश जी की अति विशाल प्रतिमा भी इसी बस्तर के एक पहाड़ पर विराजमान है। आदिवासियों की धरती बस्तर में एक विशाल गोवर्धन पर्वत भी है। इस गोवर्धन पर्वत की गुफा में भगवान श्रीकृष्ण की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है और यहां हर वर्ष गुड़ी पड़वा पर विशाल सकलनारायण मेला लगता है। इस मेले में बस्तर संभाग के साथ ही उड़ीसा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस वर्ष भी यहां मेला भरा।
बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड अंतर्गत ग्राम पोसडपल्ली में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला सकलनारायण मेला इस वर्ष भी गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। यह मेला क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।मेले की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के विधि विधान से पूजन-अर्चन के साथ की गई। इसके पश्चात गुड़ी पड़वा के दिन भव्य रथ यात्रा निकाली गई। यह पारंपरिक रथयात्रा यहां भरने वाले मेले का मुख्य आकर्षण होती है।

4 किमी की सीधी चढ़ाई
इस मेले की सबसे विशेष बात यह है कि पहाड़ की चोटी पर स्थित एक प्राचीन गुफा में भगवान श्रीकृष्ण सदियों से विराजमान हैं। श्रद्धालुओं को उनके दर्शन के लिए लगभग 3 से 4 किलोमीटर की कठिन और खड़ी चढ़ाई पार करनी पड़ती है। इस पवित्र स्थल को स्थानीय लोग गोवर्धन पर्वत के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से दर्शन करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों तेलंगाना और महाराष्ट्र से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय ग्रामीणों एवं समिति द्वारा जल, खीर और फल का निःशुल्क वितरण किया गया, जो सेवा और समर्पण का सुंदर उदाहरण है।

पर्यटन की संभावनाएं
धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके विकास की अपार संभावनाएं हैं। क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि यहां सड़क, पेयजल, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं का समुचित विकास किया जाए, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।







