लक्ष्मी नारायण लहरे/सारंगढ़: अपने ही पुत्र की नाराजगी और उत्पीड़न के कारण अपने घर से बेघर हुए गोरखनाथ नायक और उनकी पत्नी पद्मा को इस वर्ष 12 जनवरी 2026 को सारंगढ़ स्थित आशा निकेतन वृद्धा आश्रम में रहने की व्यवस्था मिली थी। लेकिन 14 मार्च को वहां के जिम्मेदारों ने उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण बाहर निकाल दिया, जिससे वृद्ध दंपति को अपनी सुरक्षा और निवास की चिंता ने घेर लिया।

क्या हुआ घटना के दिन?
- गोरखनाथ और उनकी पत्नी को आशा निकेतन से बाहर निकालने के बाद जवाबदेह अधिकारियों की ओर से उन्हें सियान सदन भेजने की सलाह दी गई।
- वृद्ध दंपति ने सीधे सारंगढ़ कलेक्टर कार्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
- 16 मार्च को उन्होंने लिखित आवेदन के माध्यम से न्याय की मांग की और सीटी कोतवाली सारंगढ़ में भी शिकायत दर्ज कराई।
- आवेदन में गोरखनाथ ने स्पष्ट किया कि आशा निकेतन के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने उनके साथ भेदभाव किया और उनके नाम आवेदन में दर्ज किए गए हैं।
परिवार की स्थिति
- गोरखनाथ नायक और उनकी पत्नी पद्मा शारीरिक रूप से कमजोर और वृद्ध हैं।
- उनका पुत्र नशा मुक्ति केंद्र में रखा गया है, जिसके कारण परिवार बिखर गया।
- गोरखनाथ ने बताया कि उनके साथ एक व्यक्ति ने चार पहिया वाहन से उन्हें जंगल में छोड़ने का प्रयास किया, जिसे जांच का विषय माना जा रहा है।
गोरखनाथ की मांग
- गोरखनाथ ने जनदर्शन में कलेक्टर को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।
- उनका सवाल यह है कि आशा निकेतन सरकारी वृद्धा आश्रम है, फिर भी उन्हें और उनकी पत्नी को क्यों धक्का देकर बाहर निकाला गया।
- उन्होंने न्याय की मांग करते हुए कहा कि घटना में जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थान की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
गंभीर सवाल
- आखिर क्यों वृद्ध दंपति को आशा निकेतन से बाहर का रास्ता दिखाया गया?
- क्या वहां के अधिकारियों ने नियमों और संवैधानिक कर्तव्यों का पालन किया?
- कौन है जो उन्हें जंगल में छोड़ने का प्रयास कर रहा था?
- क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी?







