कुसमुंडा संवाददाता – गुरदीप सिंह
कुसमुंडा क्षेत्र स्थित प्रोजेक्ट ऑफिस में स्वच्छता व्यवस्था की गंभीर अनदेखी सामने आई है। कार्यालय परिसर में बना शौचालय वर्षों से साफ-सफाई के अभाव में बदहाल स्थिति में पहुंच चुका है। “स्वच्छ भारत मिशन” जैसे बड़े अभियान के बावजूद यहां की स्थिति शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है।
शौचालय में चारों ओर गंदगी फैली हुई है, नियमित सफाई नहीं होने के कारण दुर्गंध से वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि टॉयलेट का दरवाजा टूटा हुआ है, जिससे गोपनीयता पूरी तरह खत्म हो गई है। इस स्थिति में खासकर महिला कर्मचारियों और आगंतुकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार मौखिक शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है, इस पर भी स्पष्टता नहीं है। न तो नियमित सफाईकर्मी की व्यवस्था दिखती है और न ही किसी अधिकारी द्वारा निगरानी की जा रही है।
स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिहाज से यह स्थिति बेहद गंभीर है। गंदगी के कारण संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

अब सवाल यह उठता है कि जब एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र के कार्यालय का यह हाल है, तो आम जगहों की स्थिति कैसी होगी। संबंधित विभाग और प्रबंधन को तत्काल संज्ञान लेते हुए शौचालय की सफाई, मरम्मत और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि कर्मचारियों विशेषकर महिलाओं को सुरक्षित और स्वच्छ सुविधाएं मिल सकें।







