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खतरे के बीच भी नहीं रुका सफर – LPG से लदे भारतीय जहाज होर्मुज पार कर देश की ओर दौड़े

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इजरायल-अमेरिका और ईरान में चल रही भीषण जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 2 भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर जग वसंत और पाइन गैस वर्तमान में फारस की खाड़ी से भारत की ओर रवाना हो रहे हैं। ये जहाज लारक-केशम चैनल की ओर बढ़ रहे हैं और दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरेंगे। सोमवार की स्थिति के अनुसार ये दोनों टैंकर एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) से लदे हुए हैं, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

शारजाह के पास से गुजर रहे जहाज

जहाजों की स्थिति ट्रैकिंग डेटा से पता चलती है कि वे यूएई के शारजाह के पास से निकलकर होर्मुज की ओर बढ़ रहे हैं। जग वसंत बीपीसीएल द्वारा चार्टर्ड है, जबकि पाइन गैस आईओसी द्वारा संचालित है। दोनों जहाजों में भारतीय क्रू हैं और वे सुरक्षित पारगमन के लिए तैयार हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के कारण होर्मुज में शिपिंग ट्रैफिक बेहद कम हो गया है। युद्ध शुरू होने के बाद से अधिकांश जहाज रुके हुए थे, क्योंकि ईरान ने कई देशों के जहाजों पर हमले की धमकी दी और कुछ को निशाना बनाया।

पहले भी होर्मुज से सुरक्षित आ चुके भारतीय जहाज

आकंड़ों के अनुसार युद्ध से पहले होर्मुज से सामान्यतः रोजाना 100 से अधिक जहाज गुजरते थे, लेकिन अब ट्रैफिक ट्रिकल (बहुत कम) हो गया है। हाल के दिनों में कुछ भारतीय जहाजों (जैसे शिवालिक, नंदा देवी) ने सुरक्षित पारगमन किया, जिसमें भारतीय कूटनीति और ईरानी नेवी की गाइडेंस शामिल थी। भारत ने होर्मुज में अपने 20 से अधिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग की मांग की है। मोदी सरकार की डिप्लोमैसी से कुछ जहाजों को ईरानी नेवी ने पूर्व-अनुमति के साथ गाइड किया। जग वसंत और पाइन गैस की यह यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है, क्योंकि एलपीजी भारत की घरेलू खपत (रसोई गैस) के लिए जरूरी है।

तेल-गैस की कीमतों को लेकर चिंता

यदि युद्ध जारी रहता है तो भारत समेत दुनिया भर में तेल-गैस की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा। फिलहाल ये भारतीय टैंकर होर्मुज पार करने के बाद भारतीय बंदरगाहों (जैसे मुंद्रा, कोचीन आदि) की ओर बढ़ेंगे। भारतीय सरकार और कंपनियां स्थिति पर नजर रख रही हैं, और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह घटना भारत की “मल्टी-एलाइनमेंट” नीति को दर्शाती है, जहां वह ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखते हुए क्षेत्रीय तनाव से बचने की कोशिश कर रहा है।

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