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बस्तर हेरिटेज मैराथन में विजेता का अपमान

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

5 और 10 किमी दौड़ में प्रथम आए ऋतुराज को नहीं मिला पुरस्कार 

जगदलपुर। बस्तर हेरिटेज मैराथन- 2026 बड़ा इतिहास रच गया, मगर प्रशासनिक चूक ने इस उपलब्धि पर बड़ा धब्बा लगा दिया है। दरअसल कई विजेताओं को पुरस्कार ही नहीं दिया गया। इन्ही में से एक धावक है ऋतुराज, जो इस मैराथन की 5 किमी और 10 किमी दौड़ में प्रथम रहे हैं। सम्मानित होने की उम्मीद में ऋतुराज मंच के ठीक नीचे दरी पर बैठे रहे, जबकि दौड़ की अन्य केटेगरी के विजेता धावक मंच पर अतिथियों के साथ मौजूद थे।
शासन द्वारा आयोजित बस्तर हेरिटेज मैराथन-2026 की सारी व्यवस्थाएं शानदार रहीं, इस बात में कोई दो राय नहीं है। सारा प्रशासनिक तंत्र अपनी ओर से इस आयोजन को सफल बनाने में पूरी शिद्दत से जुटा रहा। स्वास्थ्य विभाग के साथ ही छत्तीसगढ़ कंटिनेंटल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पीटल, ओम अस्पताल जैसे बड़े अस्पतालों के डॉक्टर्स और पूरी टीम धावकों के ईलाज के लिए डटे रहे। वहीं धावकों के लिए शीतल पेय एवं एनर्जी ड्रिंक्स के भी जगह जगह इंतजाम किए गए थे। 200 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सलियों के साथ ही बस्तर संभाग के सातों जिलों के करीब दस हजार धावक इस मैराथन में शामिल हुए। बड़ी बात यह रही कि सर्वाधिक लंबी दौड़ के खिलाड़ियों के लिए मशहूर देश इथोपिया और केन्या के धावकों ने भी बस्तर हेरिटेज मैराथन में भाग लेकर इस आयोजन को वैश्विक पहचान दिला दी। प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं से प्रतिभागी संतुष्ट नजर आए, लेकिन अंतिम समय में सारे किए धरे पर पानी फिर गया। यह जानकार अफसोस हुआ कि कुछ विजेताओं को पुरस्कार तो दूर की बात सम्मान तक देना भी मुनासिब नहीं समझा गया। सूत्र बता रहे हैं कि बस्तर हेरिटेज मैराथन आयोजन में अफसरशाही इस कदर हावी हो गई कि विजेताओं को उनके पुरस्कार के लिए सूचना भी नहीं दी जा रही है। विजेता खुद लगातार पुरस्कार राशि की तलाश में भटक रहे हैं। मैराथन में भाग लेने वाले धावक ऋतुराज ने 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर केटेगरी में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। ऋतुराज मंच से नाम पुकारे जाने की उम्मीद में मंच के नीचे दरी पर घंटों बैठे रहे, जबकि अन्य केटेगरी के विजेता धावक अतिथियों के हाथों पुरस्कार पाकर उल्लसित होते रहे। वहीं दूसरी ओर ऋतुराज निराशा की धुंध से घिरे बैठे रहे। बताते हैं कि ऋतुराज सरीखे अन्य केटेगरी के कई धावकों को भी पुरस्कार राशि नहीं दी गई है। इस दुर्व्यवस्था के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है, जिला प्रशासन को इस पर ध्यान देना होगा।

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