चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन नवमी तिथि कहलाता है, जो पूरे नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप — मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
मां सिद्धिदात्री कौन हैं?
मां सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियां (अलौकिक शक्तियां) प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।
- “सिद्धि” का अर्थ है सफलता या दिव्य शक्ति
- “दात्री” का अर्थ है देने वाली
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिससे उनका आधा शरीर देवी का हो गया और वे अर्धनारीश्वर रूप में प्रकट हुए।
पूजा का महत्व
- इस दिन की पूजा से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं
- साधक को सिद्धि, बुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है
- नवरात्रि के पूरे व्रत का फल इसी दिन मिलता है
- आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति मिलती है
पूजा विधि
- सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें
- घर के मंदिर में मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
- गंगाजल से शुद्धि करें
- फूल, अक्षत, रोली, धूप-दीप अर्पित करें
- मां को हलवा, पूड़ी, चना का भोग लगाएं
- दुर्गा सप्तशती या सिद्धिदात्री मंत्र का पाठ करें
- अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें
कन्या पूजन (कंजक पूजन)
नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है।
- 9 छोटी कन्याओं (नवदुर्गा का प्रतीक) और 1 लड़के (भैरव) को बुलाया जाता है
- उनके पैर धोकर पूजा की जाती है
- उन्हें भोजन (पूड़ी, चना, हलवा) कराया जाता है
- उपहार और दक्षिणा दी जाती है
भोग और प्रसाद
इस दिन मां को खासतौर पर ये चीजें चढ़ाई जाती हैं:
- हलवा
- काला चना
- पूड़ी
- नारियल
- फल
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
- चार भुजाएं
- कमल के आसन पर विराजमान
- हाथों में गदा, चक्र, शंख और कमल
- अत्यंत शांत और दिव्य स्वरूप







