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स्वा जीवराज रात्रे जी की ऐतिहासिक विदाई, हजारों नम आंखों ने दी अंतिम सलामी

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सारंगढ़ संवाददाता – अशोक मनहर

सरसींवा(सारंगढ़-बिलाईगढ़):-बहुजन समाज पार्टी के समर्पित एवं लोकप्रिय कार्यकर्ता युवराज रात्रे के निधन पर क्षेत्र शोक में डूब गया। ग्राम करियारवार (टिहलीपाली) में उनकी अंतिम यात्रा एक ऐतिहासिक जनसैलाब में तब्दील हो गई, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने उमड़कर उन्हें भावभीनी विदाई दी। यह दृश्य केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि एक जननायक के प्रति समाज के असीम प्रेम, सम्मान और विश्वास का जीवंत प्रमाण था।
अंतिम यात्रा में बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टंडन, प्रदेश महासचिव डॉ. रोहित डहरिया सहित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों, सर्वसमाज के प्रतिनिधियों एवं अन्य राजनीतिक दलों के लोगों ने भी भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कर एकजुटता का परिचय दिया।
नीले कफन में लिपटे पार्थिव शरीर के साथ डीजे की श्रद्धांजलि धुनों के बीच निकली अंतिम यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। मार्ग के दोनों ओर खड़े लोगों ने पुष्प अर्पित कर नम आंखों से अंतिम विदाई दी। हर चेहरे पर शोक और हर कदम पर सम्मान स्पष्ट झलक रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अंतिम यात्रा में करीब 3 हजार से अधिक लोगों की भीड़ शामिल रही, जिसने पूरे आयोजन को अभूतपूर्व बना दिया। यह भीड़ केवल संख्या नहीं, बल्कि दिवंगत युवराज रात्रे द्वारा जीवनभर अर्जित किए गए जनविश्वास और सामाजिक पूंजी का प्रतीक थी।
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि युवराज रात्रे केवल एक पार्टी कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक समरसता, संघर्षशीलता और जनसेवा की मिसाल थे। उन्होंने अपने व्यवहार, सरलता और निष्ठा से हर वर्ग के लोगों के दिलों में जगह बनाई थी। यही कारण है कि उनके निधन पर हर समाज, हर वर्ग और हर विचारधारा के लोग एक साथ खड़े नजर आए। इस दुःखद घड़ी में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि युवराज रात्रे का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा और ईमानदार व्यक्तित्व ही व्यक्ति की सबसे बड़ी संपत्ति होती है, जो मृत्यु के बाद भी उसे अमर बना देती है। युवराज रात्रे की अंतिम विदाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चे जनसेवक की पहचान उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज के दिलों में बसे उसके सम्मान और प्रेम से होती है।

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