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गोंडवाना समाज ने प्रकृति शक्ति बुढ़ाल पेन की कृतज्ञता अर्पित करते हुए मनाया मरका पंडुम

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

गोंडवाना समाज का आमा जोगानी पर्व संपन्न
वैज्ञानिक विश्लेषण, नशामुक्ति और मातृशक्ति की भूमिका पर रहा जोर

​जगदलपुर।​गोंडवाना समाज समन्वय समिति जिला बस्तर के तत्वावधान में आज ‘आमा जोगानी’ यानि मरका पंडूम का पारंपरिक पेन उत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर सांस्कृतिक गरिमा के साथ-साथ सामाजिक सुधार, नशामुक्ति और समुदाय की सर्वांगीण प्रगति का संकल्प भी दोहराया गया।
​कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. जीवन सलाम ने ‘आमा जोगानी’ के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों ने प्रकृति के चक्र को समझते हुए इन परंपराओं को रचा था। उन्होंने कहा कि नए फल को प्रकृति को समर्पित करना केवल आस्था नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारे उत्तरदायित्व का वैज्ञानिक तरीका है। ​समाज के प्रबुद्ध सदस्य तिरु अरुण नेताम ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आदिवासी समुदाय को शराब और अन्य नशों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि नशा समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है और एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए युवाओं को इससे बचना अनिवार्य है।

​मातृ शक्ति और पर चर्चा
​कार्यक्रम में तिरुमाय शीतला कोर्राम ने समाज में मातृशक्ति की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के बिना समाज अधूरा है और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए। वहीं, तिरु गिरिवर सिंह मंडावी ने गोंडवाना के गौरवशाली इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों पर गर्व हो सके। माखन लाल सोरी ने मरका पंडुम की व्याख्या करते हुए बात रखी। वहीं नरेश मरकाम ने पेन बुढ़ाल पेन एवं पेन व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान युवा प्रभाग के मनोनीत पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

एकता, आर्थिक मजबूती जरुरी
​कोषाध्यक्ष तिरु भानुप्रताप कोडोपी ने समाज के आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और समाज में सेवा राशि में भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामूहिक योगदान ही समाज के विकास के कार्यों को गति दे सकता है। इससे पूर्व गोंडवाना समाज के कार्यकारी अध्यक्ष तिरु बीएस नेताम ने सभी सगाजनों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में समाज की एकता पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए पूरे समाज को एकजुट रहना होगा। ​मुख्य कार्यक्रम एवं पूजा विधान की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई, जिसमें नए आम (मरका) इष्ट देवों को अर्पित कर पूरे क्षेत्र की खुशहाली और बेहतर भविष्य की कामना की गई। इस अवसर पर प्रमुख रूप से विष्णु मरकाम, दीपा मांझी, एमएल सोरी संभागीय उपाध्यक्ष, डॉ. देवचंद सलाम, रमेश ध्रुव, धनवेंद्र कतलाम, तुलोरिन नेताम, अशोक नेताम, रामगुलाल दुग्गा, चंद्रकांत ध्रुव, एसएल मरकाम, संरक्षक एसएस कोरेटी, श्याम नेताम, तामेश्वर नेताम, ममता पोटाई, रामेश्वरी सोरी, महेंद्र नागवंशी, डॉ. राजेंद्र राज सोरी, नीरज कुंजाम एवं भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग उपस्थित रहे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी नरेश मरकाम ने दी।

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