जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जयसवाल
जिला जांजगीर-चांपा ।
स्वर्गीय बिसाहूदास महंत स्मृति शासकीय चिकित्सालय (BDM अस्पताल) चांपा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला अस्पताल में संचालित जीवनदीप समिति के फंड के कथित दुरुपयोग और नियमों को दरकिनार कर की जा रही नियुक्तियों से जुड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों और आरोपों ने न केवल अस्पताल प्रबंधन बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जरूरत से ज्यादा नियुक्तियां, नियमों की अनदेखी
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में आवश्यकता से अधिक पदों पर नियुक्ति की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि जिन पदों की वास्तविक जरूरत नहीं है, वहां भी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है। यह पूरा मामला जीवनदीप समिति के फंड से जुड़ा हुआ है, जिसका उपयोग मूलतः मरीजों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
दंत सहायक की नियुक्ति पर विवाद
अस्पताल में दंत सहायक की नियुक्ति को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि जिस पद पर कार्य की स्पष्ट आवश्यकता नहीं है, वहां भी नियुक्ति कर दी गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की गई या फिर किसी विशेष लाभ के उद्देश्य से निर्णय लिया गया।
डीएमएफ कर्मचारी की पुनः भर्ती की तैयारी
मामले का एक और अहम पहलू यह है कि जिला खनिज न्यास (DMF) फंड से कार्यरत एक कर्मचारी को पहले हटा दिया गया था, लेकिन अब उसी कर्मचारी को जीवनदीप समिति के माध्यम से दोबारा भर्ती करने की तैयारी की जा रही है। इस कदम को लेकर पक्षपात और नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं।
फार्मासिस्ट भर्ती पर भी सवाल
अस्पताल में पहले से ही तीन नियमित फार्मासिस्ट कार्यरत हैं, इसके बावजूद एक और फार्मासिस्ट की भर्ती की तैयारी की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यह नियुक्ति न केवल अनावश्यक है बल्कि फंड के गलत उपयोग की ओर भी संकेत करती है।
जीवनदीप फंड के उपयोग पर उठे गंभीर प्रश्न
जीवनदीप समिति का मुख्य उद्देश्य अस्पताल में संसाधनों का विकास, मरीजों को बेहतर सुविधाएं और अतिरिक्त सहायता प्रदान करना होता है। लेकिन यदि इस फंड का उपयोग मनमाने ढंग से नियुक्तियों में किया जा रहा है, तो यह सीधे-सीधे उसके उद्देश्य के विपरीत है। इससे फंड की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग बढ़ेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
बीडीएम अस्पताल चांपा में सामने आया यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं
बीडीएम अस्पताल चांपा में सामने आया यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की आवश्यकता को उजागर करता है। जीवनदीप समिति जैसे महत्वपूर्ण फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करना ही मरीजों के हित में सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।







