मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है, जहां अमेरिका ने ईरान को चारों ओर से घेर लिया है और जमीनी हमले की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 50 हजार अमेरिकी सैनिक इस क्षेत्र में तैनात किए गए हैं, जो आम दिनों की तादाद से करीब 10 हजार अधिक हैं। इनमें 2,500 मरीन और 2,500 नौसैनिक शामिल हैं, जिससे अमेरिकी घेराबंदी और मजबूत हुई है।
अमेरिकी सैन्य तैयारी
अमेरिकी सेना के 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के 2,000 पैराट्रूपर्स ईरान के करीब हमले की स्थिति में तैनात हैं। पेंटागन के अनुसार यह तैयारी होर्मुज़ जलमार्ग को सुरक्षित करने और ईरानी हमलों का जवाब देने के लिए की गई है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने पहले ही ईरान के 90 से अधिक सैन्य ठिकानों और मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर बमबारी की है।
होर्मुज़ जलमार्ग की चुनौती
विश्व का करीब 20% तेल इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है, जो ईरानी हमलों के कारण बंद हो गया है। अमेरिका इस रणनीतिक मार्ग को फिर से खोलने के लिए किसी द्वीप या जमीन के हिस्से पर कब्जा करने का विकल्प भी चुन सकता है। पेंटागन ने 2,000 पैराट्रूपर्स को इस तरह के कठिन ऑपरेशन्स के लिए स्टैंडबाय पर रखा है।
ट्रंप का बयान
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्हें ईरान के तेल पर नियंत्रण करना पसंद है। उन्होंने खार्ग द्वीप का उदाहरण देते हुए कहा था कि अमेरिकी सैनिक इसे आसानी से कब्जे में ले सकते हैं। ट्रंप ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि यह अमेरिका के रणनीतिक हितों का हिस्सा है, और खार्ग द्वीप पर कब्जा करना संभव है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे बड़े और मजबूत देश पर केवल 50 हजार सैनिकों के साथ कब्जा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है और किसी भी समय कार्रवाई की संभावना जताई है।







