युसूफ खान/बलरामपुर। जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां पहले सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ग्रामीण को जमीन पर अधिकार दिया गया और अब उसी भूमि पर वन विभाग द्वारा बुलडोजर चलाए जाने का आरोप लगा है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
मामला बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदी का है। यहां के ग्रामीण कृष्ण कुमार यादव का आरोप है कि वे वर्षों से “छोटे झाड़” की भूमि पर काबिज होकर खेती कर रहे थे। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में शासन द्वारा उनसे हर्जाना भी लिया गया और राजस्व अभिलेख (खसरा) में उनका नाम दर्ज कर कब्जा मान्य किया गया।
लेकिन अब अचानक वन विभाग ने मौके पर जेसीबी लगाकर जमीन को समतल करना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई से किसान परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब राजस्व विभाग ने दस्तावेज जारी कर कब्जा स्वीकार किया, तो वन विभाग किस आधार पर कार्रवाई कर रहा है। 🤔
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि यह भूमि वन विभाग की थी, तो इतने वर्षों तक विभाग चुप क्यों रहा। उनका कहना है कि दो दिन पहले गांव में अवैध अतिक्रमण से जुड़ी खबर सामने आने के बाद वन विभाग ने अचानक कार्रवाई की, जिसे वे दबाव की राजनीति बता रहे हैं।
गांव में इस घटना को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने इसे “सीधी गुंडागर्दी” और “गरीब किसान पर अत्याचार” करार दिया है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकारी कागज हैं और दूसरी तरफ बुलडोजर की ताकत, जिसके बीच गरीब किसान पिस रहा है।
अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि सिस्टम पर भरोसे का बन गया है। यदि दस्तावेज होने के बावजूद कार्रवाई होती है, तो आम लोगों का प्रशासन पर विश्वास कैसे कायम रहेगा।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई रोकने और न्याय दिलाने की मांग की है। फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
क्या मिलेगा ग्रामीणों को न्याय या फिर कागज और बुलडोजर का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?







