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चांपा थाना घेराव मामला: कानून से ऊपर कौन? भाजपा कार्यकर्ताओं की बयानबाजी पर उठे गंभीर सवाल

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जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़) — चांपा थाना परिसर में उस समय तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई, जब कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से थाना का घेराव कर पुलिस कार्यवाही का विरोध किया। जानकारी के अनुसार, सत्यम चौहान के चालान काटे जाने को लेकर यह पूरा विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते तीखी बहस और नोकझोंक में बदल गया। करीब आधे घंटे तक थाना परिसर में हंगामा चलता रहा, जिसे पुलिस अधिकारियों और सिपाहियों की समझाइश के बाद शांत कराया गया।
“भाजपा कार्यकर्ताओं का चालान नहीं कटना चाहिए” — बयान बना विवाद का कारण घटनास्थल पर मौजूद कुछ वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारियों द्वारा यह कथन सामने आया कि “भाजपा कार्यकर्ताओं का किसी भी स्थिति में चालान नहीं काटा जाना चाहिए, चाहे वे बिना लाइसेंस हों, बिना नंबर प्लेट हों या नशे की हालत में हों।”
यह बयान न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और समानता के सिद्धांत को भी चुनौती देता है।
कानून सबके लिए बराबर, फिर यह विशेषाधिकार क्यों? भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कानून सभी नागरिकों के लिए समान होता है। यदि कोई व्यक्ति, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, यातायात नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
ऐसे में यह कहना कि “किसी खास दल के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई न हो” — सीधे-सीधे कानून की अवहेलना और प्रशासन पर दबाव बनाने जैसा है।
पुलिस पर आरोप और अवैध वसूली की बात
घटनाक्रम के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा चांपा थाना पर अवैध वसूली और अन्य गतिविधियों के आरोप भी लगाए गए। हालांकि इन आरोपों का कोई ठोस प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। यदि ऐसे आरोप हैं, तो उनके लिए विधिवत जांच की मांग करना ही लोकतांत्रिक तरीका होता है, न कि थाना घेराव कर दबाव बनाना।
मुख्यमंत्री की छवि पर भी असर
छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय की सरकार सुशासन, पारदर्शिता और कानून के राज की बात करती है। लेकिन यदि उसी पार्टी के कार्यकर्ता खुलेआम कानून को चुनौती दें और विशेष छूट की मांग करें, तो यह सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य माना जाएगा।
प्रशासन को सख्ती और निष्पक्षता दिखानी होगी
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून का पालन सभी पर समान रूप से लागू हो रहा है या नहीं।
प्रशासन को चाहिए कि—
कानून व्यवस्था बनाए रखने में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव स्वीकार न करे
यदि थाना घेराव और दबाव की घटना हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच हो
पुलिस और जनता के बीच विश्वास कायम रखने के लिए पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
चांपा थाना घेराव की यह घटना केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की परीक्षा है।
यदि किसी भी दल के कार्यकर्ता खुद को कानून से ऊपर समझने लगें, तो यह समाज के लिए खतरनाक संकेत है।
अब जरूरत है सख्त संदेश देने की—कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह आम नागरिक हो या किसी भी पार्टी का कार्यकर्ता।

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