बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
कुसमी। विकासखंड कुसमी क्षेत्र के जामटोली घाट में एक बार फिर सड़क सुरक्षा की गंभीर लापरवाही सामने आई है। डिवाइडर और सुरक्षा इंतजाम के अभाव में यहां लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने इस खतरनाक मोड़ को लोगों के बीच ‘मौत का मोड़’ बना दिया है। ताजा हादसे में एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार, जामटोली घाट में बोलेरो वाहन (क्रमांक CG 04 HA 4528) अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। बताया जा रहा है कि घाट के खतरनाक मोड़ पर वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा, जिसके चलते यह भीषण हादसा हुआ। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि वाहन चालक प्रीतम नगेसिया (19 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं वाहन में सवार पुरान नगेसिया गंभीर रूप से घायल हो गया।
हादसे के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद घायल को वाहन से बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लेते हुए जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
पहले भी ले चुका है कई जानें
स्थानीय लोगों का कहना है कि जामटोली घाट लंबे समय से दुर्घटनाओं का केंद्र बना हुआ है। यहां न तो डिवाइडर लगाए गए हैं और न ही किसी प्रकार के चेतावनी संकेतक या सुरक्षा बैरियर की व्यवस्था की गई है। घाट का मोड़ बेहद खतरनाक होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक माह पहले भी इसी स्थान पर सामरी बॉक्साइट से जुड़ा एक भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद भी सुरक्षा उपायों की मांग उठी थी, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश, उठी सुरक्षा व्यवस्था की मांग
लगातार हो रही दुर्घटनाओं से क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जामटोली घाट पर तत्काल डिवाइडर, क्रैश बैरियर, रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड और सड़क चौड़ीकरण जैसे सुरक्षा उपाय किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह खतरनाक मोड़ और भी कई जिंदगियों को निगल सकता है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि समय रहते उचित कदम उठाकर लोगों की जान बचानी चाहिए।







