बलरामपुर संवाददाता युसूफखान
बिना स्थान बताए बुलावा, राजस्व विभाग की समानांतर जांच, मीडिया बाहर—पूरी प्रक्रिया पर उठे गंभीर प्रश्न
कुसमी। बहुचर्चित हंसपुर हत्याकांड में अब जांच प्रक्रिया ही विवादों के घेरे में आ गई है। जिला प्रशासन द्वारा की जा रही कार्यवाही को लेकर एक के बाद एक ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनसे न केवल पारदर्शिता बल्कि निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसीलदार द्वारा जारी अधूरे नोटिस से शुरू हुआ विवाद अब छुट्टी के दिन एसडीएम कार्यालय में पूछताछ, बंद कमरे में बयान और संदिग्ध प्रवेश जैसे मामलों तक पहुंच गया है।
अधूरा नोटिस बना विवाद की जड़
मामले की शुरुआत उस नोटिस से हुई, जिसमें ग्राम पंचायत हंसपुर के सरपंच सहित अन्य संबंधितों को 11 अप्रैल 2026 को बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया, लेकिन स्थान का उल्लेख नहीं किया गया। इस अधूरी सूचना से ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।

पुलिस जांच के बीच राजस्व विभाग की समानांतर कार्रवाई
हत्याकांड की जांच पहले से पुलिस द्वारा की जा रही है। ऐसे में राजस्व विभाग द्वारा समानांतर जांच शुरू करना लोगों को खटक रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे जांच को प्रभावित करने या भटकाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
नोटिस लेकर पहुंचे ग्रामीण, तहसील मिला बंद
नोटिस मिलने के बाद जब ग्रामीण कुसमी तहसील कार्यालय पहुंचे, तो शनिवार होने के कारण कार्यालय बंद मिला। बाद में उन्हें सचिव और पटवारी के माध्यम से जानकारी दी गई कि बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया एसडीएम कार्यालय में चल रही है।

छुट्टी के दिन खुला एसडीएम कार्यालय, दर्ज हुए बयान
इसके बाद ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां छुट्टी के दिन कार्यालय खुला मिला। यहां एसडीएम अनमोल विवेक टोप्पो और तहसीलदार रॉकी एक्का की मौजूदगी में दोपहर से देर शाम तक ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए। सरकारी अवकाश के दिन इस तरह विशेष रूप से कार्यालय खोलकर जांच किए जाने से भी संदेह की स्थिति बनी है।
एक ही विभाग, एक ही कार्यालय—निष्पक्षता पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जिस विभाग से मामला जुड़ा है, उसी विभाग के अधिकारियों द्वारा और उसी कार्यालय में जांच करना निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। लोगों के अनुसार इससे जांच प्रभावित हो सकती है।

मृतक
मीडिया को रखा बाहर, बंद कमरे में हुई पूछताछ
पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान मीडिया को कार्यालय के बाहर ही रोक दिया गया। अंदर की कार्यवाही बंद कमरे में की गई, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरा गए।
शिक्षक की एंट्री ने बढ़ाया विवाद
पूछताछ के दौरान एक और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया। जहां पत्रकारों को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी, वहीं एक शिक्षक मनीष सिन्हा बिना रोक-टोक कार्यालय के भीतर पहुंच गए और करीब 20 मिनट तक अंदर रहे।
बताया जा रहा है कि उक्त शिक्षक को पूर्व में शिकायत के बाद एसडीएम कार्यालय से हटाया जा चुका है। ऐसे में उनकी मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया है।
आरोपित पूर्व एसडीएम से जुड़े पहलू भी चर्चा में
मामले की संवेदनशीलता इस वजह से भी बढ़ गई है क्योंकि निलंबित पूर्व एसडीएम करुण कुमार डहरिया पहले ही इस हत्याकांड में आरोपित हैं और जेल में बंद हैं। उनके कार्यकाल से जुड़े अन्य आरोप भी सामने आ चुके हैं।
इसी बीच जांच में शामिल वर्तमान एसडीएम और पूर्व एसडीएम के बीच कथित संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं भी तेज हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जल्दबाजी या दबाव? रात में नोटिस, सुबह पेशी..
ग्रामीणों का आरोप है कि 9 अप्रैल को जारी नोटिस की तामिली 10 अप्रैल की रात में कराई गई और अगले ही दिन सुबह उपस्थित होने के लिए कहा गया। इतनी कम समयसीमा को लेकर लोगों में नाराजगी है और इसे दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
पहले से आक्रोशित ग्रामीण, बढ़ा अविश्वास
हंसपुर हत्याकांड को लेकर ग्रामीणों में पहले से ही आक्रोश था। अब जांच प्रक्रिया के इस तरीके ने अविश्वास को और बढ़ा दिया है। लोगों की मांग है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जाए।
उठते बड़े सवाल
बिना स्थान बताए बयान दर्ज कराने का नोटिस क्यों जारी किया गया?
पुलिस जांच के बीच राजस्व विभाग की समानांतर जांच का औचित्य क्या है?
छुट्टी के दिन बंद कमरे में पूछताछ क्यों की गई?
मीडिया को बाहर रखकर एक बाहरी व्यक्ति को अंदर कैसे प्रवेश मिला?
क्या जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है?







