युसूफ खान/अंबिकापुर/बलरामपुर। बलरामपुर जिले में मनरेगा के तहत हो रहे चेक डैम निर्माण कार्य को लेकर अब मामला सिर्फ प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। अंबिकापुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सामरी विधायक उद्देश्वरी पैकरा का पत्रकारों के सवालों पर नाराज होना इस मुद्दे को और अधिक गरमा गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने राजपुर और शंकरगढ़ जनपद क्षेत्रों में चेक डैम निर्माण में कथित अनियमितताओं और लागत में गड़बड़ी को लेकर सवाल पूछे, तो विधायक ने स्पष्ट रूप से जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने तीखे स्वर में कहा कि यह मंच भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देने के लिए नहीं है। इस प्रतिक्रिया ने न केवल उपस्थित लोगों को चौंकाया, बल्कि पूरे मामले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया।
दरअसल, जिले में मनरेगा के तहत 30 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से चेक डैम निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप सामने आए हैं कि कई स्थानों पर वास्तविक लागत से अधिक के एस्टीमेट तैयार किए गए हैं और कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस संबंध में शिकायतें की गई हैं, जिसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच भी की है।
हालांकि, जांच की प्रक्रिया जारी होने के बावजूद जनप्रतिनिधि स्तर पर स्पष्टता का अभाव अब सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है और इसे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। वहीं, सत्तापक्ष के लिए यह स्थिति असहज मानी जा रही है, खासकर तब जब जनता के बीच विकास कार्यों की पारदर्शिता एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं, तो इसका सीधा असर न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर जमीनी राजनीति तक गूंज सकता है।
फिलहाल, सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि पारदर्शिता के साथ निष्पक्ष कार्रवाई होती है, तो यह न केवल जनता का भरोसा मजबूत करेगी, बल्कि व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देगी। वहीं, किसी भी प्रकार की लापरवाही या लीपापोती इस मुद्दे को और अधिक तूल दे सकती है।







