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न्याय की जीत: चपरीद कोटवार को पद से पृथक करने के फैसले से ग्रामीणों और किसानों में खुशी की लहर

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आरंग संवाददाता – सोमन साहू
रायपुर/आरंग:
ग्राम चपरीद के किसानों और समस्त ग्रामवासियों के लिए यह खबर बड़ी राहत और जीत लेकर आया है। नायब तहसीलदार समोदा के न्यायालय द्वारा ग्राम चपरीद के कोटवार राजकुमार मानिकपुरी को उसके पद से पृथक, बर्खास्त करने का ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिया गया है। इस फैसले की खबर मिलते ही चपरीद के किसानों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
क्या था पूरा मामला?
ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार, किसानो के खेत तक जाने वाले सीसी रोड जो की सांसद निधि से वर्ष 2021 मे बना था साथ ही ग्रामीणों ने बहुत पहले से कच्चा धरसा सड़क निर्माण कराया था उक्त दोनो रास्तों को कोटवार राजकुमार मानिकपुरी ने कूट रचना से पंचायत चुनाव अचार सहिता 2025 मे जेसीबी से उखाड़ कर अपने खेत मे मिला लिया था। इस रास्ते का उपयोग ग्रामीण किसान अपने कृषि कार्यों और खेतों तक आने-जाने के लिए करते थे कोटवार के इस कुकृत्य से यह रास्ता ही खतम हो गया। कोटवार के इन सब हरकतों से गॉव मे अशांति आक्रोश का माहौल फैल गया।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने कोटवार राजकुमार मानिकपुरी पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे जैसे ग्राम नौकर सेवा भूमि को अपने निजी भूमि के रूप मे रजिस्ट्री करवाना, समोदा बैराज डुबान मे भू अर्जन से पहले भूमि को कई छोटे छोटे दुकड़ो मे बांट कर अपने बेटे बेटियों परिवार के नाम पर रजिस्ट्री करवा के शासन से अवैध मुआवजा प्राप्त करना, अपने कार्यों को न करना, लोक दुराचार, दबंगाई जैसे अनेक आरोप कोटवार पर लगे।
प्रशासनिक जांच और न्यायालय का सख्त फैसला
ग्राम पंचायत चपरीद द्वारा पारित प्रस्ताव और पटवारी के प्रतिवेदन के आधार पर मामला न्यायालय में चल रहा था। फैसले के मुताबिक, न्यायालय ने माना कि शासकीय राशि से निर्मित सार्वजनिक सड़क को जे.सी.बी. से उखाड़ना सार्वजनिक हित के पूरी तरह विपरीत है।
नतीजतन, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 के अधीन निर्मित कोटवारी नियम क्रमांक 05(1) के तहत कड़ा रुख अपनाते हुए नायब तहसीलदार गजेंद्र सिदार ने कोटवार राजकुमार मानिकपुरी को कोटवार पद से पृथक/बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।
किसानों और ग्रामवासियों ने जताई खुशी
इस फैसले के बाद ग्राम चपरीद के किसानों और आम जनता ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि
यह फैसला उन ताकतों के खिलाफ एक बड़ा सबक है जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर किसानों का रास्ता रोकते हैं। अब किसानों को अपने खेतों तक जाने के लिए दोबारा सुगम रास्ता मिल सकेगा। ग्रामवासियों ने इस निष्पक्ष न्याय के लिए राजस्व प्रशासन और माननीय न्यायालय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।

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