रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर के माना इलाके के नकटी गांव में उस वक्त भारी तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जब प्रशासन की टीम वहां बरसों पुराने कब्जों को हटाने के लिए लाव-लश्कर के साथ पहुंची। शुक्रवार, 26 जून को हुई इस कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीण इस कदर उग्र हो गए कि उन्होंने न केवल प्रशासन की टीम को घेर लिया, बल्कि स्थानीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले सांसद का वादा अब पूरी तरह से टूट चुका है, जिसके चलते पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।
नकटी गांव के वार्ड क्रमांक 16 और 17 में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने अचानक बेघरी का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से जैसे ही अतिक्रमण हटाने की जेसीबी और अमला गांव में दाखिल हुआ, वैसे ही बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव करते हुए कार्रवाई को तुरंत रोकने की मांग की। इस दौरान माहौल इतना गरमा गया कि वहां मौजूद भाजपा नेताओं को भी ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने भाजपा नेताओं के खिलाफ वापस जाओ के नारे लगाए और आरोप लगाया कि सरकार और उनके जनप्रतिनिधि गरीबों के आशियाने उजाड़ने पर तुले हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान खुद बृजमोहन अग्रवाल ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि किसी भी गरीब का मकान टूटने नहीं दिया जाएगा और उन्हें उसी जगह पर पट्टा या विस्थापन का सही अधिकार मिलेगा। लेकिन चुनाव जीतने के बाद प्रशासन को आगे कर इस तरह की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की जा रही है। आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं, उनके पास बिजली बिल, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे तमाम जरूरी दस्तावेज हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे यहां के मूल निवासी हैं। इसके बावजूद उन्हें बिना किसी ठोस विस्थापन नीति के अचानक बेदखल करने की तैयारी कर ली गई।
शुक्रवार की सुबह से ही नकटी गांव में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी, जिससे ग्रामीण पहले ही आशंकित थे। जैसे ही कब्जा हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं ने जेसीबी के सामने खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे प्रशासन को अपनी कार्रवाई बीच में ही रोकनी पड़ी। मौके पर पहुंचे तहसीलदार और पुलिस के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग लिखित आश्वासन और सांसद बृजमोहन अग्रवाल को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी के नजदीकी इलाकों में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर केवल गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि बड़े भूमाफियाओं पर प्रशासन हाथ डालने से कतराता है। नकटी गांव के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके आशियानों पर दोबारा बुलडोजर चलाने की कोशिश की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। फिलहाल क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीण भी एकजुट होकर अपने घरों की रखवाली कर रहे हैं।








