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सनबोरा, ददरा पारा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों में भारी भ्रष्टाचार, विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवार खुले में शौच को मजबूर – तत्काल जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग-सुखमंती सिंह

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एमसीबी: जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की जनपद पंचायत भरतपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलझर के आश्रित ग्राम सनबोरा, ददरा पारा में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर हुए घोर भ्रष्टाचार का शर्मनाक मामला सामने आया है।

यहाँ निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति, जिन्हें माननीय राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहा जाता है, के घरों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालय पूरी तरह घटिया और उपयोग के अयोग्य हैं। लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी ये परिवार आज भी खुले में, जंगलों में शौच जाने को मजबूर हैं। यह न सिर्फ स्वच्छ भारत मिशन की खुली धज्जियां उड़ा रहा है बल्कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के संवैधानिक अधिकारों का भी अपमान है।

प्रमुख बिंदु:
– घटिया निर्माण: शौचालयों का निर्माण इतना निम्न स्तर का है कि बनते ही ध्वस्त हो गए। न दरवाजे हैं, न पानी की व्यवस्था, न गड्ढे सही बने।
– कागजी खानापूर्ति: मौके पर शौचालय उपयोग लायक नहीं, लेकिन कागजों में पूर्ण दिखाकर पूरी राशि का बंदरबांट कर लिया गया।
– मूलभूत अधिकारों का हनन: विशेष पिछड़ी जनजाति को शौच जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रखना अमानवीय है और सरकार की योजनाओं को पलीता लगाना है।

इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थाई समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह ने गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से तत्काल मांग की है:

हमारी मांगें:
1. उच्च स्तरीय जांच: पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी व वित्तीय जांच विशेष टीम से कराई जाए।
2. कड़ी दंडात्मक कार्रवाई: दोषी ठेकेदार, इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर तत्काल निलंबित किया जाए व राशि की वसूली हो।
3. पुनर्निर्माण: ददरा पारा के सभी पीड़ित परिवारों के घरों में मानक अनुसार नए शौचालय 15 दिन में बनवाए जाएं।
4. योजनाओं का लाभ: विशेष पिछड़ी जनजाति के इन परिवारों को केंद्र व राज्य सरकार की सभी योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ प्राथमिकता से दिलाया जाए।

श्रीमती सुखमंती सिंह ने कहा कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के साथ यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि 7 दिवस के भीतर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई और पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो जनजातीय समाज के साथ सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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