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अहमदाबाद एयर इंडिया हादसे के सबूत नहीं होंगे सार्वजनिक, AAIB ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

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अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के सबूत सार्वजनिक नहीं होंगे। हादसे की जांच कर रही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने सबूत सार्वजनिक नहीं करने का सुप्रीम  कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। AAIB ने अपने हलफनामे में कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए कई संवेदनशील दस्तावेज आम लोगों के साथ साझा नहीं किए जा सकते। सबूतों में पायलटों के बीच की बातचीत भी शामिल है। AAIB ने मृतक पायलट के पिता पुष्कर राज सभरवाल की तरफ से दायर याचिका का जवाब देते हुए ये हलफनामा दाखिल किया है।

AIB ने हलफनामे में कहा कि पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया प्लेन क्रैश की कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (CVR) और दूसरे अहम सबूतों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। AAIB ने ऐसा नहीं करने के पीछे भारतीय कानून CVR का हवाला दिया है।

एएआईबी ने हलफनामे में कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए कई संवेदनशील दस्तावेज और रिकॉर्ड किसी बाहरी समिति या आम लोगों के साथ साझा नहीं किए जा सकते। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग (CVR), विमान के अंदर का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग, जांच के दौरान गवाहों के बयान, पायलट, एयरलाइन और अन्य कर्मचारियों के बीच हुई बातचीत, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की रिकॉर्डिंग और मृतकों, घायलों की निजी व मेडिकल जानकारी ये सभी चीजें सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। ब्यूरो ने बताया कि कि ये कानूनी पाबंदियां निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए हैं।

AAIB ने कहा कि विमान दुर्घटना जांच नियम, 2025 के नियम 17(5) के तहत कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और विमान के अंदर की रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करने पर कानूनी रोक है। ब्यूरो के मुताबिक अगर गवाहों या विमान संचालन से जुड़े लोगों को यह डर होगा कि उनके बयान बाद में सार्वजनिक कर दिए जाएंगे तो वे खुलकर जानकारी नहीं देंगे।

एनेक्स 13 में एयरक्राफ्ट दुर्घटना की जांच करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बताई गई है। वहीं आर्टिकल 26 उस देश को, जहां दुर्घटना होती है, दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू करने के लिए बाध्य करता है। वहीं, एनेक्स 13 और एयरक्राफ्ट (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2025 के तहत ‘स्टेट ऑफ रजिस्ट्री’, ‘स्टेट ऑफ ऑपरेटर’, ‘स्टेट ऑफ डिजाइन’ और ‘स्टेट ऑफ मैन्युफैक्चर’ की भागीदारी का स्पष्ट प्रावधान है। जांच प्रक्रिया में इन सभी के पास मान्यता प्राप्त प्रतिनिधियों और तकनीकी भागीदारी के माध्यम से तय अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं।

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