22 जुलाई का दिन भारत के इतिहास में बेहद खास है क्योंकि आज ‘राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस’ (National Flag Adoption Day) मनाया जाता है。आज ही के दिन, 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से पिंगली वेंकैया द्वारा 1921 के विजयवाड़ा अधिवेशन में प्रस्तुत तिरंगा ध्वज को स्वतंत्र भारत के अधिकृत राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आत्मसात किया गया।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की स्वतंत्रता, एकता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक है तथा हर रंग का एक गहरा दार्शनिक और ऐतिहासिक महत्व है। यथा ; केसरिया (Saffron): यह रंग देश के साहस, त्याग और बलिदान का प्रतीक है, सफेद (White): यह रंग शांति, सच्चाई और पवित्रता का संदेश देता है तथा हरा (Green): यह रंग हमारी भूमि की हरियाली, उर्वरता, समृद्धि और विकास का प्रतीक है एवं राष्ट्रीय ध्वज के बीच में स्थित अशोक चक्र का गहरा नीला रंग धर्म, सत्य और सतत प्रगति का प्रतीक है।
जिसे स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को अंडमान और निकोबार के पोर्ट ब्लेयर में पहली बार भारतीय स्वतंत्रता का झंडा फहराया था तो वहीं आजाद भारत में जवाहर लाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को लाल किले में तिरंगा को फहराया था।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के सम्मान को स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय ध्वज संहिता 2002 बनाया गया था जिसमें 20जुलाई 20220 को संशोधन किया जाकर झंडा अधिनियम 2022 स्थापित किया गया। गृह मंत्रालय द्वारा किए गए इस संशोधन के बाद अब कोई भी आम नागरिक राष्ट्रीय ध्वज को रात-दिन कभी भी खुले में, निजी घरों या इमारतों पर सम्मान के साथ फहरा सकता है जबकि पूर्व में तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता था, परन्तु संशोधन के बाद नए नियम के तहत तिरंगा रात में भी फहराया जा सकता है, बशर्ते वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था हो। साथ ही कोई भी आम नागरिक, निजी संगठन या शिक्षण संस्थान किसी भी दिन या अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है।
वर्तमान नियम के अनुसार अब पॉलिएस्टर और मशीन से बने राष्ट्रीय ध्वज भी उपयोग करने की अनुमति दी गई है ।
इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा महज एक कपड़ा का टुकड़ा मात्र नहीं है बल्कि हम भारतीयों के राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है फलस्वरूप आज हम सबके लिए तिरंगा के सम्मान को अक्षुण्ण रखने के संकल्प लेने का वक्त है ताकि अनंतकाल तक हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक तिरंगा आसमान की ऊंचाइयों में लहराता रहे।







