60 दिन की नौकरी तलाशने वाली सुविधा खत्म करने की तैयारी भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है बड़ा असर
वॉशिंगटन। अमेरिका में काम कर रहे विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर H-1B वीजाधारकों के लिए इमिग्रेशन नियम और सख्त होने की संभावना है। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) मौजूदा 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ रहा है। इस अवधि में नौकरी जाने के बाद H-1B कर्मचारी अमेरिका में रहकर नई नौकरी खोज सकते हैं या अपनी इमिग्रेशन स्थिति बदलने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
हालांकि, अभी यह बदलाव लागू नहीं हुआ है। प्रस्ताव को आगे की सरकारी समीक्षा और नियम बनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
क्या है मौजूदा 60 दिन की व्यवस्था?
H-1B वीजा अमेरिका में विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को रोजगार की अनुमति देता है। यदि किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी समाप्त हो जाती है, तो मौजूदा नियमों के तहत उसे सामान्यतः 60 दिन तक या उसके I-94 की वैधता समाप्त होने तक—जो भी पहले हो—नई नौकरी तलाशने या दूसरी वैध इमिग्रेशन स्थिति हासिल करने का मौका मिलता है।
यही अवधि नौकरी खो चुके विदेशी कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा मानी जाती है।
प्रस्ताव लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
यदि DHS का प्रस्ताव अंतिम रूप में लागू हो जाता है, तो नौकरी खत्म होने के बाद H-1B कर्मचारी को अमेरिका में नई नौकरी तलाशने के लिए मिलने वाली मौजूदा 60 दिन की राहत खत्म हो सकती है।
इसका मतलब यह होगा कि नौकरी जाने की स्थिति में कर्मचारी के पास अमेरिका में रुककर नया रोजगार हासिल करने के लिए पहले जैसी सुरक्षित समय-सीमा नहीं होगी। ऐसे मामलों में अमेरिका में वैध रूप से बने रहने के लिए दूसरी इमिग्रेशन व्यवस्था या नया नियोक्ता बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगा।
भारतीयों पर क्यों पड़ सकता है ज्यादा असर?
H-1B कार्यक्रम में भारतीय प्रोफेशनल्स की बड़ी हिस्सेदारी है। खासतौर पर आईटी, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और अन्य हाई-स्किल सेक्टर में बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी अमेरिका में काम करते हैं।
इसी वजह से नौकरी छूटने के बाद ग्रेस पीरियड कम या खत्म होने का असर भारतीय कर्मचारियों पर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे उन लोगों की चिंता बढ़ सकती है, जिनके पास अमेरिका में नौकरी और वीजा स्टेटस दोनों रोजगार से जुड़े हैं।
अचानक नौकरी जाने पर बढ़ेगी परेशानी
टेक कंपनियों में छंटनी के दौरान H-1B कर्मचारियों को एक साथ नौकरी गंवानी पड़ सकती है। मौजूदा 60 दिन उन्हें दूसरी कंपनी में अवसर तलाशने, नया H-1B नियोक्ता खोजने या अपनी इमिग्रेशन स्थिति के लिए वैकल्पिक रास्ता अपनाने का समय देते हैं।
अगर यह सुविधा समाप्त होती है, तो नौकरी जाने और अमेरिका में कानूनी रूप से बने रहने के बीच उपलब्ध समय काफी सीमित हो सकता है।
कंपनियों पर भी पड़ेगा असर
इस प्रस्ताव का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिकी कंपनियां भी H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं और टेक्नोलॉजी तथा अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी प्रतिभा पर निर्भर रहती हैं।
इमिग्रेशन नियमों में अधिक सख्ती से कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें बनाए रखना कठिन हो सकता है। कुछ विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इससे अमेरिका के लिए वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करना भी मुश्किल हो सकता है।
क्या अभी से H-1B धारकों को अमेरिका छोड़ना होगा?
नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। अभी 60 दिन की मौजूदा ग्रेस पीरियड खत्म नहीं हुई है। DHS की ओर से इसे समाप्त करने का प्रस्ताव आगे बढ़ रहा है, लेकिन प्रस्ताव को अंतिम नियम बनने से पहले सरकारी समीक्षा और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
इसलिए फिलहाल H-1B कर्मचारियों के लिए मौजूदा नियम लागू हैं।
आगे क्या होगा?
अब प्रस्ताव की समीक्षा के बाद अमेरिकी प्रशासन यह तय करेगा कि 60 दिन की ग्रेस पीरियड को पूरी तरह खत्म किया जाए, इसमें बदलाव किया जाए या मौजूदा व्यवस्था जारी रखी जाए।
अगर प्रस्ताव अंतिम नियम बन जाता है, तो नौकरी गंवाने वाले H-1B कर्मचारियों के लिए अमेरिका में नई नौकरी खोजने और इमिग्रेशन स्टेटस बनाए रखने की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।







