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बीजापुर में आबकारी विभाग पर उठे सवाल: सरकारी दुकानों से बोरों में भरकर बीयर खपाने का आरोप, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?

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पुकार बाफना/बीजापुर। जिले में शराब के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। सरकारी शराब दुकानों से बीयर बोरों में भरकर बाहर भेजे जाने के आरोप सामने आने के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सरकारी दुकानों से निकलने वाली बीयर कथित तौर पर कोचियों तक पहुंच रही है और फिर इसे अलग-अलग इलाकों में अवैध तरीके से खपाया जा रहा है।

मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी शराब दुकान से बीयर बाहर निकल रही है तो इसकी जानकारी आबकारी अमले को क्यों नहीं हो रही? अगर विभाग को इसकी भनक है तो कार्रवाई क्यों नहीं? और अगर जानकारी नहीं है, तो फिर दुकानों की निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है?

बोरों में भरकर बीयर ले जाने का आरोप, विभाग की निगरानी कहां?

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी और आरोपों के मुताबिक, बीयर को बोरों में भरकर सरकारी दुकानों से बाहर ले जाने और फिर कथित रूप से अवैध बिक्री किए जाने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह सिर्फ अवैध बिक्री का मामला नहीं, बल्कि सरकारी शराब दुकानों के स्टॉक और बिक्री व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल है।

आखिर दुकान में आने वाली बीयर का हिसाब-किताब क्या है? स्टॉक और बिक्री का मिलान नियमित रूप से हो रहा है या नहीं? सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कितनी प्रभावी है? इन सवालों के जवाब आबकारी विभाग को देने होंगे।

पहले खबरें, फिर भी वही हाल—कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

अवैध शराब बिक्री को लेकर समय-समय पर खबरें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद यदि आरोपित गतिविधियां जारी हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कार्रवाई का असर जमीन पर नहीं दिख रहा, या फिर अवैध कारोबारियों के हौसले विभागीय निष्क्रियता के कारण बढ़ रहे हैं?

लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कुछ कोचियों को आखिर इतनी आसानी से शराब कैसे उपलब्ध हो रही है। हालांकि, इन चर्चाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती।

क्या विभाग और कोचियों के बीच है कोई ‘कनेक्शन’?

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू कथित साठगांठ को लेकर उठ रहे सवाल हैं। क्या सरकारी दुकानों से शराब बाहर निकालकर अवैध बिक्री करने वालों को किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है? या फिर यह पूरा मामला निगरानी में गंभीर चूक का नतीजा है?

इन सवालों का जवाब सिर्फ निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है। इसलिए पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाया जाना जरूरी है कि शराब किस दुकान से निकली, कितनी मात्रा में निकली, किसके नाम पर बिक्री दर्ज हुई और वह शराब वास्तव में कहां पहुंची।

कलेक्टर से जांच की मांग, CCTV और स्टॉक रिकॉर्ड खंगालने की जरूरत

मामले में जिला प्रशासन से मांग है कि संबंधित सरकारी शराब दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और शराब की निकासी से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि नियमों का उल्लंघन या अवैध बिक्री का प्रमाण मिलता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अब निगाहें जिला प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर हैं। क्या इन आरोपों की जांच होगी? क्या सरकारी दुकानों से शराब की कथित निकासी का सच सामने आएगा? और अगर किसी स्तर पर मिलीभगत साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?

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