पत्नी, बेटी और बेटों समेत सभी अभियुक्तों को मिली राहत, भिलाई न्यायालय में अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की बचाव पक्ष की पैरवी
भिलाई/दुर्ग। भूमि विवाद से जुड़े दो आपराधिक प्रकरणों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भिलाई, जिला दुर्ग के न्यायालय ने 10 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए घनश्याम नारंग एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों सहित सभी अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया। प्रकरण में शिकायतकर्ता की ओर से घनश्याम नारंग के साथ उनकी पत्नी, बेटी और बेटों समेत परिवार के अन्य सदस्यों को भी आरोपी बनाया गया था।
भूमि और कब्जे के विवाद से जुड़ा था मामला
दोनों प्रकरणों की पृष्ठभूमि भूमि एवं कब्जे से संबंधित विवाद से जुड़ी थी। अभियोजन की ओर से आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 427, 447, 506 सहपठित धारा 34 के तहत आरोप लगाए गए थे।
विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। वहीं बचाव पक्ष ने अभियोजन साक्षियों के कथनों में मौजूद विसंगतियों, विरोधाभासों तथा आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्यों की कमियों को न्यायालय के समक्ष रखा।

प्रत्येक आरोपी की भूमिका साबित करना जरूरी
बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा परिवार के विभिन्न सदस्यों को आरोपी बनाया गया है, लेकिन प्रत्येक अभियुक्त के विरुद्ध स्वतंत्र एवं विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से उसकी विशिष्ट भूमिका स्थापित किया जाना आवश्यक है।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि केवल पारिवारिक संबंध अथवा सामान्य आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति का आपराधिक दायित्व निर्धारित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक अभियुक्त के विरुद्ध कथित अपराध के आवश्यक तत्वों को विधि-सम्मत एवं विश्वसनीय साक्ष्य से प्रमाणित करना अभियोजन का दायित्व है।
अभियोजन साक्ष्यों का किया गया न्यायिक परीक्षण
विचारण के दौरान प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के समग्र मूल्यांकन के साथ दोनों पक्षों की दलीलों पर न्यायालय ने विचार किया। बचाव पक्ष ने विशेष रूप से अभियोजन के साक्ष्यों में मौजूद कथित विरोधाभासों और कमियों को रेखांकित किया।
परिवार के सदस्यों को आरोपी बनाए जाने के मुद्दे पर भी बचाव पक्ष ने कहा कि केवल परिवार का सदस्य होना किसी व्यक्ति को कथित घटना में सहभागी सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पत्नी, बेटी और बेटों समेत प्रत्येक अभियुक्त की कथित भूमिका का स्वतंत्र एवं विश्वसनीय प्रमाण आवश्यक है।
अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने की पैरवी
दोनों मामलों में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी, जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अधिवक्ता, ने पैरवी की।
अधिवक्ता जोशी ने अभियोजन के मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का विधिक परीक्षण करते हुए अभियुक्तों की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि आपराधिक न्याय व्यवस्था में किसी व्यक्ति को केवल आरोप, अनुमान या संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन को प्रत्येक आरोपी की भूमिका और अपराध के आवश्यक वैधानिक तत्वों को प्रमाणित करना होता है।
न्यायालय ने सभी अभियुक्तों को किया दोषमुक्त
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के न्यायिक परीक्षण के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भिलाई द्वारा 10 सितंबर 2026 को दोनों प्रकरणों में घनश्याम नारंग, उनकी पत्नी, बेटी, बेटों एवं अन्य अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया गया।
यह निर्णय आपराधिक न्याय के उस मूल सिद्धांत को रेखांकित करता है कि अभियोजन द्वारा आरोपों को विधि-सम्मत एवं विश्वसनीय साक्ष्य के आधार पर प्रमाणित किया जाना आवश्यक है।
प्रकरण एक नजर में
- प्रकरण क्रमांक: 1042/2022 एवं 1048/2022
- अपराध क्रमांक: 0149/2021 एवं 0154/2021
- थाना: अमलेश्वर, जिला दुर्ग
- धाराएं: 294, 427, 447, 506 सहपठित धारा 34 भा.दं.सं.
- निर्णय दिनांक: 10 सितंबर 2026
- न्यायालय: न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भिलाई, जिला दुर्ग
- निर्णय: घनश्याम नारंग एवं परिवार के अन्य सदस्यों सहित सभी अभियुक्त दोषमुक्त
- बचाव पक्ष के अधिवक्ता: देव प्रसाद जोशी
- प्रैक्टिस: जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर
- मोबाइल: 9893354327






