-श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से संस्कार और सनातन संस्कृति का संदेश, अंतरजातीय विवाह व धर्मांतरण पर भी रखे विचार
जिला जांजगीर-चांपा चांपा। श्रद्धेय डॉ. श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने सोमवार को चांपा में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए समाज, परिवार, युवा पीढ़ी और सनातन संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। महाराज जी ने लोगों से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने, माता-पिता का सम्मान करने तथा युवाओं को नशे से दूर रखने का आह्वान किया।
महाराज जी की प्रेसवार्ता उनके अस्थायी निवास जयपुरिया ट्रेडर्स, मंझली तालाब, स्टेशन रोड, चांपा में दोपहर 12 बजे आयोजित हुई। इस दौरान उन्होंने अपनी कथा यात्रा और वर्तमान सामाजिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
17 वर्ष की उम्र से कर रहे श्रीमद्भागवत कथा
डॉ. श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने बताया कि उन्होंने कम उम्र, लगभग 17 वर्ष की अवस्था से ही श्रीमद्भागवत कथा एवं संगीतमय कथा-रास के माध्यम से लोगों तक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संदेश पहुंचाने का कार्य प्रारंभ किया। उनके अनुसार देश के विभिन्न स्थानों पर अब तक 500 से अधिक श्रीमद्भागवत कथाओं का आयोजन किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में परिवारों में संवाद और संस्कारों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। बच्चों को माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा और कर्तव्य का भाव समझना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रीमद्भागवत कथा में पहुंचकर श्रवण कुमार जैसे आदर्श चरित्रों की कथा से प्रेरणा लेने की अपील की।
नशे को बताया परिवार और युवा भविष्य के लिए गंभीर चुनौती
महाराज जी ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित करने के साथ-साथ पूरे परिवार को संकट में डाल सकता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सेवा और सकारात्मक गतिविधियों की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशे की वजह से अनेक परिवारों में आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक परेशानियां पैदा होती हैं। इसलिए समाज के हर वर्ग को मिलकर नशामुक्त वातावरण बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
विवाह और सामाजिक परंपराओं पर भी रखे विचार
प्रेसवार्ता के दौरान डॉ. अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने अंतरजातीय विवाह के विरोध में अपना मत व्यक्त किया और कहा कि विवाह अपनी जाति में ही होना चाहिए। यह उनका व्यक्तिगत सामाजिक-धार्मिक दृष्टिकोण है, जिस पर उन्होंने समाज के सामने अपने विचार रखे।
धर्मांतरण को लेकर जताई चिंता
महाराज जी ने धर्मांतरण के मुद्दे पर भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इसके विरोध की बात कही। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार तथा मीडिया से इस विषय को गंभीरता से उठाने और सनातन धर्म एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि समाज को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक एकता के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाने चाहिए।
जांजगीर-चांपा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पहुंचने की अपील
डॉ. अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने बताया कि जिला मुख्यालय जांजगीर से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे अपने परिवार के साथ कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें और आध्यात्मिक एवं संस्कारपूर्ण संदेशों को अपने जीवन में अपनाएं।
उन्होंने कहा कि कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार और समाज को संस्कार, सदाचार तथा सकारात्मक जीवन की दिशा देने का माध्यम भी बन सकती है।
प्रेसवार्ता के माध्यम से महाराज जी ने विशेष रूप से युवाओं, अभिभावकों और समाज के लोगों से नशामुक्ति, माता-पिता के सम्मान, संस्कारों के संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता के लिए आगे आने का आह्वान किया।







