कोंडागांव/रायपुर, 16 सितंबर 2026।
देश एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ (17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026) मनाया जा रहा है। इस अवसर पर जहां विभिन्न शासकीय एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा सेवा, समर्पण और जनहित से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में वर्ष 1998 से 2012 के मध्य नियुक्त होकर वर्तमान में सेवारत शिक्षकों के समक्ष उत्पन्न गंभीर समस्याओं को लेकर आवाज उठाई गई है।
संकुल समन्वयक शिक्षक संघ, छत्तीसगढ़ के प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष रामचंद्र सोनवंशी के नेतृत्व में संघ की ओर से प्रदेश के शिक्षा मंत्री को एक पत्र प्रेषित कर सेवारत शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के लिए ठोस एवं संवेदनशील निर्णय लेने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद से लंबे समय से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों के बीच TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर चिंता और असमंजस का वातावरण निर्मित हुआ है। संघ ने शासन से वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, योगदान एवं पूर्व सेवा को ध्यान में रखते हुए इस विषय में राहत प्रदान करने की मांग की है।
संघ की प्रमुख मांगें
1. सेवारत शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से पूर्ण मुक्ति
संघ ने कहा है कि वर्ष 1998 से 2012 के मध्य नियुक्त अनेक शिक्षक पिछले दो से ढाई दशकों से अधिक समय से विद्यालयों में पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने अपने सेवाकाल में लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर उनके भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संघ का तर्क है कि ऐसे दीर्घसेवित शिक्षकों के अनुभव एवं योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।
2. प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व सेवा की गणना एवं वरिष्ठता का संरक्षण
संघ ने वर्ष 1998 से 2012 तक नियुक्त शिक्षकों की सेवा की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से किए जाने तथा उनकी वरिष्ठता को सुरक्षित रखने की मांग की है। संघ के अनुसार, पूर्व सेवा की गणना से संबंधित विषय का शीघ्र निराकरण शिक्षकों के सेवा हितों के लिए आवश्यक है।
3. पदोन्नति एवं क्रमोन्नति की लंबित प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए
संघ ने वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति एवं क्रमोन्नति की प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ कर पूर्ण करने की मांग की है। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी प्रक्रियाओं के कारण पात्र शिक्षकों को उनके वैधानिक सेवा लाभ समय पर नहीं मिल पा रहे हैं।
4. पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पूर्ण पेंशन लाभ का मार्ग प्रशस्त किया जाए
संघ ने शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि को सेवा गणना में शामिल करते हुए पेंशन निर्धारण एवं संबंधित आर्थिक लाभ प्रदान किए जाने की मांग भी रखी है। संघ के अनुसार, वर्षों तक शिक्षा विभाग में सेवा देने वाले शिक्षकों को उनकी संपूर्ण सेवा अवधि के अनुरूप सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा मिलना आवश्यक है।
शासन से संवेदनशील एवं सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा
संघ के प्रांत कार्यकारी अध्यक्ष रामचंद्र सोनवंशी ने कहा कि इन शिक्षकों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लगाया है। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में शिक्षकों के बीच व्याप्त चिंता एवं असमंजस को दूर करने के लिए शासन स्तर पर शीघ्र सकारात्मक पहल आवश्यक है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन सेवारत शिक्षकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस एवं सकारात्मक निर्णय लेगा, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत और उनके भविष्य को आवश्यक सुरक्षा मिल सके।







