विकास की अंधी दौड़ में भाग रहे इंसानों के लिए एक डराने वाली खबर सामने आई है। दुनिया में पहली बार किसी एआई एजेंट के सरकारी वेबसाइट में सेंध लगाने का मामला सामने आया है। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में हुई। ओपनएआई एजेंट ने यहां के हेल्थकेयर सर्विस पोर्टल में सेंध लगा कर फाइलों तक पहुंचकर जानकारी हासिल की। इनमें हेल्थ खर्च और दवा सब्सिडी से जुड़ा डेटा था। ओपनएआई ने इस घटना की सूचना 54 दिन बाद सरकार को दी। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने न्यूयॉर्क में ओपनएआई प्रमुख सैम ऑल्टमैन से फोन पर बात कर देरी पर नाराजगी जताई।
इस बीच ओपनएआई के सीईओ सैम ने कहा कि एआई पर नियंत्रण खोने का खतरा बना हुआ है। देश मिलकर सुरक्षा मानक तय करें, ताकि तकनीक ज्यादा शक्तिशाली होने पर भी नियंत्रण में रहे। ऑस्ट्रेलिया अब जांच करेगा कि कंपनी पर आपराधिक मामला बनता है या नहीं। यह भी जांच की जा रही है कि ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां इस घुसपैठ को पहले क्यों नहीं पकड़ सकीं। ओपनएआई ने भी माना कि उसके मॉडलों ने ऐसे स्टेप्स लिए, जिनकी जानकारी कंपनी का नहीं थी।
यूएन में एआई दिग्गज बोले- अब वैश्विक नियंत्रण जरूरी
एआई के बढ़ते खतरों पर यूएनएससी में टेक दिग्गजों ने अपनी चिंताएं रखीं। ओपनएआई के सीईओ सैम समेत सभी का कहना है कि एआई पर वैश्विक नियंत्रण जरूरी है।
एंथ्रोपिक: सीईओ अमोडेई ने चेताया कि गलत तरीके से संभाला गया एआई पूरी मानवता के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने जैविक हथियार बनाने में एआई के इस्तेमाल को रोकने के साझा नियम मांगे।
हगिंग फेस: सीईओ क्लेमेंट डेलांग ने एआई की ताकत किसी एक कंपनी या देश तक सीमित न रहने देने पर जोर दिया।
एंथ्रोपिक के एआई मॉडल क्लॉड ने डीएनए डेटा खंगालकर एआरटी नाम का एंजाइम सिस्टम खोजा है। वैज्ञानिक पहले इसकी पहचान नहीं कर पाए थे। क्लॉड की इस रिसर्च से जीन शोध में नए रास्ते खुलेंगे। डीएनए एडिट कर बीमारी पैदा करने वाली चीजें हटाई व कोशिका में मनचाही खासियतें जोड़ी जा सकेंगी। एआरटी जीन एडिटिंग में इस्तेमाल होने वाली क्रिस्पर तकनीक के पैटर्न जैसा है। 950 एआई एजेंट्स ने 2 लाख से ज्यादा एंजाइम खंगालकर यह सिस्टम 21 घंटे में खोजा। इसकी अहमियत यह है कि एआई भविष्य में रिसर्च की रफ्तार काफी बढ़ाएगा।