दृढ़ इच्छाशक्ति और सीखने की ललक के साथ अर्जुन ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए 10वीं की परीक्षा 500 में 335 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की है। अर्जुन की इस दृढ़ इच्छा शक्ति मे सहायक हुए पुलिस के आला अधिकारी जिन्होने लगातार उसका मनोबल बढ़ाया परीक्षा के लिए आवश्यक पुस्तक एव संसाधन उन्हे उपलब्ध कराया । परीक्षा के फार्म भरने से लेकर उनकी परीक्षा की तैयारी में सहायक बने अधिकारी ।
अर्जुन वर्ष 2010 में माओवादी संगठन में शामिल हुआ था, लेकिन संगठन में रहते हुए भी उसने पढ़ाई जारी रखने की अपनी इच्छा को कभी समाप्त नहीं होने दिया। अक्टूबर 2025 में 210 सशस्त्र माओवादियों के साथ जगदलपुर में आत्मसमर्पण करने के बाद अर्जुन ने अपने जीवन की नई शुरुआत शिक्षा के माध्यम से करने का संकल्प लिया।
समर्पण के बाद अर्जुन ने 10वीं की परीक्षा की तैयारी की और अपने 7 अन्य साथियों के साथ 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह उपलब्धि उसके दृढ़ संकल्प, मेहनत और बदलते जीवन की प्रेरणादायक मिसाल है। पुलिस अधीक्षक बीजापुर उमेश प्रसाद यादव द्वारा अर्जुन की इस उपलब्धि के लिए बधाई दी एवं आगे की पढ़ाई के लिए जो आवश्यक होगा हरसंभव मद्द का आश्वासन दिये ।
अब अर्जुन का लक्ष्य 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने गांव तोड़का में शिक्षादूत के रूप में कार्य करना है । वह गांव के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके जीवन में ज्ञान का उजियारा फैलाना चाहता है।
अर्जुन का सपना है कि गांव के बच्चे पढ़ें, आगे बढ़ें और शिक्षा के माध्यम से गांव एवं पूरे क्षेत्र के विकास की नई कहानी लिखें।
पुनर्वासित माओवादी, अर्जुन ओयाम -“बंदूक से नहीं, शिक्षा के उजियारे से बदलेगा गांव का भविष्य।”







