बिलासपुर। सेवा का अर्थ हमेशा बड़ा काम करना नहीं, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों के जीवन में छोटा-सा बदलाव लाना भी समाजसेवा है। रामसेतु निर्माण में गिलहरी के योगदान की तरह हर व्यक्ति अपनी सामर्थ्य के अनुसार समाज के लिए योगदान दे सकता है। यह बात लायंस क्लब बिलासपुर के अध्यक्ष हरदीप सिंह सलूजा ने गुरुवार को बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम ‘हमर पहुन’ में कही।
कार्यक्रम में सलूजा ने पत्रकारों के साथ अपने बचपन, पारिवारिक पृष्ठभूमि, व्यवसाय और समाजसेवा से जुड़े अनुभव साझा किए। इस अवसर पर क्लब की ओर से अतिथियों का पुष्पगुच्छ, सफेद वस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत किया गया।
20 दिसंबर 1964 को हुई थी लायंस क्लब बिलासपुर की स्थापना
हरदीप सिंह सलूजा ने बताया कि लायंस क्लब बिलासपुर की स्थापना 20 दिसंबर 1964 को हुई थी। छह दशक से अधिक समय से यह संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और जरूरतमंदों की सहायता के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। वर्तमान सत्र में अब तक क्लब द्वारा 29 सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जा चुका है।
स्वास्थ्य से लेकर जरूरतमंदों की सहायता तक सेवा कार्य
क्लब की ओर से स्वास्थ्य जांच शिविर, चिकित्सकों और सीए का सम्मान, पोलियो उन्मूलन, जनजागरूकता अभियान तथा जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने जैसे कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित सेवा सप्ताह के दौरान जिला अस्पताल में फल वितरण, मातृछाया में राशन एवं आवश्यक सामग्री, आंगनबाड़ी के बच्चों को भोजन, मुक-बधिर बच्चों को टिफिन और पानी की बोतलें तथा जरूरतमंद बस्तियों में राशन वितरण किया गया।
गुरुवार को गायत्री अस्पताल में तीनों महिला ब्लॉक, क्लिनिकल एवं अन्य जरूरतमंदों को भी सहायता उपलब्ध कराई गई। जरूरत के अनुसार राशन, फल और कपड़े वितरित किए गए।
जरूरतमंदों की सहायता ही सच्ची समाजसेवा
सलूजा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गांव में समय पर सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। छोटे बच्चों के सामने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को देखना और उससे जुड़ी परिस्थितियों को समझना भी एक संवेदनशील अनुभव है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के बाद उनके चेहरों पर दिखाई देने वाली संतुष्टि ही सेवा कार्यों की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए जरूरी नहीं कि कोई बहुत बड़ा काम किया जाए। किसी जरूरतमंद की छोटी-सी मदद भी उसके जीवन में बड़ी खुशियां ला सकती है।
संदेश: सेवा के लिए बड़ा पद या बड़ा धन नहीं, बल्कि बड़ा दिल और मदद करने की भावना जरूरी है।







