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चांदो वन परिक्षेत्र में पौधारोपण के नाम पर गड़बड़ी का आरोप, कागजों में 6,771 पौधे, जमीन पर धान-मक्का की खेती!

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-इदरीकला में 61.610 हेक्टेयर वन भूमि पर पौधारोपण की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल, उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

युसूफ खान/बलरामपुर। बलरामपुर जिले के चांदो वन परिक्षेत्र अंतर्गत बीट चांदो के ग्राम पंचायत इदरीकला से पौधारोपण कार्य में कथित अनियमितता और वन भूमि पर खेती किए जाने का मामला सामने आया है। वर्ष 2022-23 में कक्ष क्रमांक P-3283 की 61.610 हेक्टेयर भूमि पर कागजी रिकॉर्ड के अनुसार 6,771 पौधे लगाए जाने का उल्लेख है। लेकिन मौके पर पौधे नजर नहीं आने और वहां धान-मक्का की फसल उगाए जाने के आरोपों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कागजों में पौधारोपण, मौके पर खेती!

जानकारी के अनुसार, संबंधित पौधारोपण स्थल पर तार घेराव के भीतर जाकर निरीक्षण करने पर पौधों के स्थान पर धान और मक्का की फसल दिखाई देने का दावा किया गया है। यदि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज पौधारोपण के बावजूद मौके पर पौधे मौजूद नहीं हैं, तो यह जांच का गंभीर विषय है।

सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से पौधारोपण पर बड़ी राशि खर्च करती है। ऐसे में यदि पौधारोपण केवल कागजों तक सीमित रह गया है, तो यह सरकारी धन के उपयोग, पौधों के रखरखाव और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

सरकारी धन के उपयोग पर उठे सवाल

कक्ष क्रमांक P-3283 में दर्ज 6,771 पौधों की वास्तविक स्थिति, पौधारोपण पर खर्च की गई राशि, पौधों की देखरेख और उनके जीवित रहने की स्थिति की जांच जरूरी है। हालांकि, सरकारी राशि के गबन या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

वन परिक्षेत्र अधिकारी ने क्या कहा?

मामले को लेकर जब चांदो वन परिक्षेत्र अधिकारी से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि उनकी नई पदस्थापना हुई है और वे अभी संबंधित क्षेत्र का दौरा नहीं कर पाए हैं। उन्होंने जल्द ही मौके पर जाकर निरीक्षण करने और स्थिति देखने की बात कही।

अधिकारी के इस बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि संबंधित क्षेत्र में पौधारोपण कार्य की निगरानी किस स्तर पर की गई और यदि वन भूमि पर खेती हो रही है, तो इसे रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?

वन भूमि पर खेती, कार्रवाई का इंतजार

स्थानीय स्तर पर वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और खेती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संबंधित भूमि वन विभाग के अधीन है और वहां बिना अनुमति खेती की जा रही है, तो नियमानुसार इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस पूरे मामले में पौधारोपण से संबंधित मस्टर रोल, भुगतान विवरण, पौधों की खरीद एवं रोपण के रिकॉर्ड, जियो-टैग तस्वीरों और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट की जांच महत्वपूर्ण होगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पौधारोपण के बाद कितने पौधे जीवित रहे और उनके संरक्षण के लिए क्या व्यवस्था की गई थी।

अब बड़ा सवाल यह है कि 6,771 पौधों का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया गया और मौके पर उनकी वास्तविक स्थिति क्या है? मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच होने पर ही पौधारोपण कार्य की वास्तविकता, सरकारी राशि के उपयोग और वन भूमि पर कथित अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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