-नवरात्रि के दौरान तहसील परिसर में ‘भिक्षा एवं चंदा मांगने वालों का प्रवेश वर्जित’ लिखे सूचना-पट्ट पर जताई कड़ी आपत्ति, दो दिन का अल्टीमेटम; नगर बंद और तहसील घेराव की चेतावनी से प्रशासन में हलचल
युसूफ खान /कुसमी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी में तहसील कार्यालय परिसर में लगाए गए एक सूचना-पट्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सूचना-पट्ट पर लिखे संदेश को लेकर सकल हिंदू समाज ने कड़ी आपत्ति जताते हुए जिला प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। समाज की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जिला कलेक्टर के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कुसमी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर नायब तहसीलदार अनुग्रह करकट्टा के विरुद्ध उचित कार्रवाई और उन्हें कुसमी से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की गई है। मामले ने अब धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सार्वजनिक कार्यालयों में सूचना-पट्ट की भाषा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सूचना-पट्ट के शब्दों पर जताई आपत्ति
सकल हिंदू समाज की ओर से सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, कुसमी तहसील कार्यालय परिसर में एक सूचना-पट्ट लगाया गया है, जिस पर लिखा है— “तहसील परिसर में भिक्षा एवं चंदा मांगने वालों का प्रवेश वर्जित है।” समाज के प्रतिनिधियों ने इस सूचना-पट्ट को लेकर आपत्ति जताई है। ज्ञापन में कहा गया है कि शारदीय नवरात्रि के दौरान इस प्रकार का सूचना-पट्ट लगाए जाने से हिंदू समाज के लोगों में नाराजगी और असंतोष पैदा हुआ है।
समाज का आरोप है कि सूचना-पट्ट पर प्रयुक्त भाषा और उसे लगाए जाने के समय से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी आधार पर समाज ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर उचित कदम उठाने की मांग की है। हालांकि, सूचना-पट्ट लगाने के पीछे संबंधित अधिकारी का क्या उद्देश्य था, इस संबंध में उनका आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
नायब तहसीलदार पर कार्रवाई और स्थानांतरण की मांग
ज्ञापन में सकल हिंदू समाज ने संबंधित नायब तहसीलदार के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा उन्हें कुसमी से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है। समाज का कहना है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को समय रहते उचित निर्णय लेना चाहिए, ताकि विवाद आगे न बढ़े।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि दो दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को कुसमी से अन्यत्र नहीं भेजा गया, तो सकल हिंदू समाज नगर बंद कराने और तहसील कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होगा। साथ ही प्रस्तावित आंदोलन की जिम्मेदारी प्रशासन की होने की बात भी कही गई है।
इस चेतावनी के बाद अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं निकला, तो कुसमी में विरोध-प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है।
धार्मिक समितियों के प्रतिनिधियों ने दिया समर्थन
ज्ञापन के साथ संलग्न हस्ताक्षर सूची में कुसमी की विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक समितियों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। इनमें मां दुर्गा पूजा सेवा समिति, मां समलेश्वरी दुर्गा पूजा सेवा समिति, मां भवानी दुर्गा पूजा सेवा समिति और मां शीतला मंदिर समिति के अध्यक्षों सहित अन्य प्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।
हस्ताक्षर सूची से स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर विभिन्न समितियों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से अपनी आपत्ति प्रशासन के समक्ष रखी है। समाज की ओर से मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है।
क्या कहता है प्रशासनिक पक्ष?
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि तहसील कार्यालय एक सार्वजनिक प्रशासनिक परिसर है, जहां व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश लगाए जा सकते हैं। ऐसे में सूचना-पट्ट लगाने के उद्देश्य, उसके शब्दों और उसके क्रियान्वयन की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही, किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई या स्थानांतरण का निर्णय संबंधित तथ्यों और प्रशासनिक नियमों के आधार पर लिया जाना चाहिए।
फिलहाल, उपलब्ध ज्ञापन में सकल हिंदू समाज ने अपनी आपत्तियां और मांगें दर्ज कराई हैं। संबंधित नायब तहसीलदार तथा जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरे मामले में उनका पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
अब कलेक्टर के निर्णय का इंतजार
14 अक्टूबर को सौंपे गए ज्ञापन के बाद कुसमी में इस मामले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। एक ओर सकल हिंदू समाज ने दो दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग करते हुए नगर बंद और तहसील घेराव की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की चुनौती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन समाज की मांग पर क्या निर्णय लेता है? क्या संबंधित सूचना-पट्ट को लेकर उठे विवाद का समाधान बातचीत और जांच के माध्यम से निकलेगा, या फिर कुसमी में विरोध-प्रदर्शन की स्थिति बनेगी? आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।







