बीजापुर संवाददाता – पुकार बाफना
आवापल्ली क्षेत्र के जंगलों से रोजाना हो रही सागौन की अवैध ढुलाई ।
माफियाओं के हौसले बुलंद, दिन-दहाड़े कुल्हाड़ी और आरा मशीनों से साफ हो रहे जंगल।
शिकायतों के बावजूद वन विभाग ने साध रखी है चुप्पी, ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
बीजापुर जिले के आवापल्ली क्षेत्र से इन दिनों प्रकृति के दोहन और प्रशासनिक लापरवाही की एक गंभीर तस्वीर सामने आ रही है। इलाके के जंगलों में स्थित बेशकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लकड़ी तस्कर इस अवैध काम को रात के अंधेरे में नहीं, बल्कि दिन-दहाड़े अंजाम दे रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की वन संपदा खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है।
रोजाना हो रही है लकड़ी की ढुलाई
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, आवापल्ली क्षेत्र से हर दिन सागौन के पेड़ों को काटकर बड़ी बेखौफ के साथ वाहनों में लादकर ढुलाई (परिवहन) की जा रही है। तस्कर बिना किसी डर के जंगलों को खोखला कर रहे हैं। हरे-भरे पेड़ों पर चल रही कुल्हाड़ियों के कारण पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ रहा है।
वन विभाग की ‘आंखें बंद’, रक्षक ही भक्षक?
क्षेत्र में खुलेआम चल रही इस अवैध तस्करी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में वन विभाग ने पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं। लगातार मिल रही सूचनाओं और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तस्करों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे विभाग और लकड़ी माफियाओं के बीच साठगांठ की आशंका और गहरी हो गई है।
सरकार एक तरफ जहां पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रही है,
बीट गार्ड नियुक्त हैं, तो उनके रहते हुए इतनी बड़ी तादाद में भारी-भरकम पेड़ों की कटाई और परिवहन कैसे संभव है? यह स्थिति सीधे तौर पर जिम्मेदारों की मिलीभगत या उनकी गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है।







