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काका लरंग साय की प्रतिमा का 28 अक्टूबर को चिरई जसवंतपुर में होगा अनावरण

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सरगुजा संवाददाता – विकास अग्रवाल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों प्रतिमा अनावरण प्रस्तावित : रामलखन सिंह पैकरा
अम्बिकापुर।
अंबिकापुर के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में लरंग साय सेवा समिति के अध्यक्ष रामलखन सिंह पैकरा ने बताया कि आगामी 28 अक्टूबर को जिला बलरामपुर के चिरई जसवंतपुर में काका लरंग साय की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के हाथों प्रतिमा अनावरण किया जाना प्रस्तावित है। प्रेसवार्ता में अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत , पार्षद मनोज गुप्ता सहित लरंग साय सेवा समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर रामलखन सिंह पैकरा ने कहा कि काका लरंग साय की प्रतिमा का अनावरण केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उनके महान व्यक्तित्व, विचारों, आदर्शों, संघर्ष, सेवा और सादगी को सम्मान देने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस पहल का उद्देश्य वर्तमान और भावी पीढ़ियों को उनके जीवन से परिचित कराना तथा युवाओं को समाज के प्रति अपने नैतिक दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित करना है। समिति चाहती है कि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर सरगुजा के चहुंमुखी एवं सर्वांगीण विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करे।
काका लरंग साय जी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए पैकरा ने बताया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के अग्रणी ध्वजवाहक रहे। उन्होंने तीन बार विधायक, दो बार सांसद, केंद्रीय मंत्री तथा अविभाजित मध्यप्रदेश में राज्य मंत्री के रूप में दायित्वों का निर्वहन किया। महत्वपूर्ण सार्वजनिक पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने सरगुजा की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और अपनी जड़ों से अपना जुड़ाव बनाए रखा।
उन्होंने बताया कि माओवादी हिंसा के दौर में काका लरंग साय को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। वर्ष 2002 में एक रात सैकड़ों की संख्या में माओवादियों ने उनके निवास चिरई को घेर लिया था। समिति द्वारा साझा किए गए प्रसंग के अनुसार, जब माओवादी घर का दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे, तो काका लरंग साय की सादगी देखकर वे स्वयं लज्जित हुए और वापस जंगल की ओर लौट गए। यह प्रसंग उनके सरल जीवन और व्यक्तित्व को दर्शाता है।
पैकरा ने कहा कि अंबिकापुर में रेल लाइन लाने के लिए काका लरंग साय ने जनता की मांग को प्राथमिकता देते हुए रेलवे मंत्रालय के लगातार चक्कर लगाए। उन्होंने इस मांग के समर्थन में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समक्ष अपना इस्तीफा तक प्रस्तुत करने की बात रखी थी। इससे क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिचय मिलता है।
उन्होंने आगे बताया कि काका लरंग साय संत गहिरा गुरु के विचारों से भी गहराई से प्रभावित थे। संत गहिरा गुरु ने जनजातीय समाज में शिक्षा के प्रसार तथा मदिरा और मांसाहार से दूर रहने जैसे विचारों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। काका लरंग साय ने उन्हें अपना गुरु स्वीकार किया और उनके विचारों के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया।
रामलखन सिंह पैकरा ने कहा कि लरंग साय सेवा समिति का उद्देश्य काका लरंग साय के विचारों और सामाजिक योगदान को जन-जन तक पहुंचाना तथा उनके आदर्शों को भावी पीढ़ियों के जीवन का हिस्सा बनाना है। प्रतिमा अनावरण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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