बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर खुदाई के बाद बने गहरे गड्ढे बने खतरा, ट्रैक्टर फंसने की भी घटना; जमीन मालिक को अब भी न्याय का इंतजार
लोकेशन: गोपातु,रामानुजगंज
गोपातु। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत गोपातु में हिंडालको कंपनी की कथित खुदाई को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने करीब 15 वर्षों से लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन पर कब्जा कर खुदाई की, लेकिन काम के बाद जमीन को समतल किए बिना ही बदहाल स्थिति में छोड़ दिया। अब जमीन पर बने तालाबनुमा गहरे गड्ढे ग्रामीणों और उनके मवेशियों के लिए खतरा बने हुए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, यह जमीन सुकुल पत्नी फगईंन की बताई जा रही है। खुदाई के बाद जमीन पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि इन गड्ढों में गिरने से अब तक तीन मवेशियों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं, एक ट्रैक्टर के भी गड्ढे में फंसने की बात सामने आई है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
जमीन मालिक की फरियाद, लेकिन सुनवाई का इंतजार
जमीन मालिक का आरोप है कि अपनी समस्या को लेकर उन्होंने हिंडालको कंपनी के कुसमी स्थित कार्यालय में गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। वर्षों से जमीन बदहाल होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब उनका सवाल है कि आखिर उनकी जमीन को पहले की तरह उपयोग योग्य बनाने की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
GM ने दिया जांच और कार्रवाई का आश्वासन
मामले को लेकर हिंडालको के जीएम ने जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, अब देखना होगा कि जांच कब तक पूरी होती है और जमीन मालिक की समस्या के समाधान के लिए कंपनी की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
गोपातु में सामने आया यह मामला जमीन की सुरक्षा, मवेशियों की जान और ग्रामीणों की परेशानी से जुड़ा है। यदि खुदाई के बाद जमीन को इसी तरह असुरक्षित छोड़ दिया गया है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
अब ग्रामीणों की मांग है कि मामले की गंभीरता से जांच हो, गहरे गड्ढों को सुरक्षित किया जाए, जमीन को उपयोग योग्य बनाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं और जमीन मालिक को नियमानुसार न्याय मिले।
सवाल यही है—क्या जांच के आश्वासन के बाद कार्रवाई होगी, या गोपातु के ग्रामीणों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?







