-7 जुलाई के आदेश में संलग्न कर्मचारियों को मूल पदस्थापना संस्था में कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश, फिर दूसरे विकासखंड में जिम्मेदारी मिलने से उठे सवाल
युसूफ खान/कुसमी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शिक्षा विभाग में शासन के आदेशों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रामानुजगंज द्वारा 7 जुलाई 2026 को जारी आदेश में विभाग के अन्य कार्यालयों एवं संस्थाओं में संलग्न कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश क्रमांक 16922/जि.शि.अधि./स्कूल शिक्षा/2026 में संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ रायपुर के पत्र क्रमांक एम.आई.एस./N-123/445, दिनांक 25 जून 2026 का हवाला दिया गया है। आदेश में विभाग अंतर्गत अपने मूल पदांकित कार्यालय/संस्था से अन्य कार्यालय/संस्थाओं में संलग्न कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था के लिए एकतरफा कार्यमुक्त किए जाने का उल्लेख है।

साथ ही जुलाई 2026 के वेतन के संबंध में भी मूल पदस्थापना संस्था में उपस्थिति दर्ज होने के उपरांत वेतन आहरण की कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
फिर शंकरगढ़ के प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार कैसे?
इसी बीच जानकारी सामने आई है कि शंकरगढ़ विकासखंड में पदस्थ एक प्रधानपाठक कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 7 जुलाई 2026 के आदेश के बाद शंकरगढ़ विकासखंड में पदस्थ प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार किस आदेश के तहत दिया गया।
यदि संबंधित प्रधानपाठक को कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार देने के लिए कोई पृथक एवं सक्षम आदेश जारी किया गया है, तो उसके सामने आने के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बीईओ शंकरगढ़ ने कहा—“उच्च अधिकारी ही बताएंगे”
मामले में शंकरगढ़ विकासखंड शिक्षा अधिकारी से संबंधित प्रधानपाठक के कुसमी में मंडल संयोजक के रूप में कार्य करने और उन्हें यह प्रभार दिए जाने के संबंध में जानकारी ली गई। इस पर बीईओ शंकरगढ़ ने कहा कि “उच्च अधिकारी ही बताएंगे, जिसने आदेश किया है।”
बीईओ के इस जवाब के बाद अब यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि संबंधित प्रधानपाठक को कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक का प्रभार देने वाला आदेश आखिर किस सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया है।
आदेश और वर्तमान व्यवस्था में सामंजस्य पर सवाल
एक ओर 7 जुलाई के विभागीय आदेश में संलग्नीकरण समाप्त कर कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना संस्था में कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं दूसरी ओर शंकरगढ़ विकासखंड में पदस्थ प्रधानपाठक का कुसमी में मंडल संयोजक के रूप में कार्य करना विभागीय व्यवस्था को लेकर सवाल पैदा कर रहा है।
हालांकि, संबंधित प्रधानपाठक को कुसमी में प्रभार देने वाला कोई पृथक आदेश जारी हुआ है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी विभाग के उच्च अधिकारियों से होना बाकी है। यदि ऐसा कोई आदेश है, तो उसके सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वर्तमान व्यवस्था 7 जुलाई के आदेश के किस प्रावधान के तहत की गई है।
विभाग से स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत
मामले में शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित प्रधानपाठक की मूल पदस्थापना वर्तमान में किस संस्था में है, उन्हें कुसमी में मंडल संयोजक का प्रभार किस आदेश से दिया गया है तथा इस प्रभार के लिए किस सक्षम अधिकारी की स्वीकृति प्राप्त है।
मुख्य सवाल यही है—जब संलग्न कर्मचारियों को मूल पदस्थापना संस्था में लौटाने का आदेश जारी हुआ था, तो शंकरगढ़ में पदस्थ प्रधानपाठक को कुसमी विकासखंड में मंडल संयोजक का प्रभार किस आदेश और किस सक्षम अधिकारी के अनुमोदन से दिया गया?







