संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जांजगीर ओवरब्रिज पर बुलेट और कार की भिड़ंत में भाई-बहन गंभीर रूप से घायल; ड्यूटी पर जा रहीं महिला आरक्षक ने तत्काल पहुंचाई मदद, अब लापरवाह कार चालक पर कार्रवाई और महिला आरक्षक के सम्मान की उठी मांग
जिला जांजगीर-चांपा । पुलिस की वर्दी केवल कानून का पालन कराने, अपराधियों पर शिकंजा कसने और यातायात व्यवस्था संभालने का प्रतीक नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने के लिए आगे आने का नाम भी है। इसका जीवंत उदाहरण जांजगीर के ओवरब्रिज पर देखने को मिला, जहां चांपा थाना में पदस्थ महिला आरक्षक संगीता लहरे ने अपनी संवेदनशीलता, तत्परता और मानवीय कर्तव्यनिष्ठा से ऐसा सराहनीय कार्य किया, जिसने पुलिस विभाग की छवि को गौरवान्वित किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांजगीर ओवरब्रिज पर दोपहर लगभग 12 बजकर 49 मिनट पर बुलेट मोटरसाइकिल और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। बुलेट में सारंगढ़ क्षेत्र के रहने वाले भाई-बहन सवार थे। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि दोनों को पैरों में गंभीर चोटें आईं और फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। घायल भाई-बहन दर्द से कराह रहे थे और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी।

इसी दौरान चांपा थाना में पदस्थ महिला आरक्षक संगीता लहरे राज्योत्सव कार्यक्रम जांजगीर में अपनी ड्यूटी पर जा रही थीं। रास्ते में दुर्घटना का दृश्य देखकर उन्होंने अपनी ड्यूटी का हवाला देकर आगे बढ़ जाना उचित नहीं समझा। घायल युवती की दर्दभरी आवाज सुनते ही वे तत्काल सहायता के लिए रुक गईं। उन्होंने बिना समय गंवाए पीसीआर एवं डायल 112 को सूचना दी और दुर्घटनास्थल पर जुट रही भीड़ को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगीता लहरे ने केवल सूचना देने तक अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी, बल्कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका निभाई। दोनों भाई-बहन को चांपा के नायक अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार प्रारंभ हुआ। दोपहर लगभग 1 बजकर 20 मिनट तक घायलों को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की गई। संकट की उस घड़ी में महिला आरक्षक की तत्परता घायल परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई।
कार चालक की लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो, आखिर सड़क सुरक्षा से खिलवाड़ कब तक?
इस दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर किस परिस्थिति में बुलेट और कार के बीच इतनी जोरदार भिड़ंत हुई? क्या कार चालक तेज गति से वाहन चला रहा था? क्या यातायात नियमों का उल्लंघन किया गया था? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
पुलिस प्रशासन से मांग है कि दुर्घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाए, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जाएं तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए। यदि जांच में कार चालक की लापरवाही या यातायात नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो उसके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम एवं भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाए।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि घायल भाई-बहन को समुचित उपचार मिले और उनकी स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। सड़क पर किसी की लापरवाही का खामियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़े, यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
वर्दी के पीछे छिपी इंसानियत ने जीता लोगों का दिल
आज के समय में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान कई बार लोग मदद के लिए आगे आने के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त दिखाई देते हैं। ऐसे माहौल में महिला आरक्षक संगीता लहरे का आगे बढ़कर घायलों की सहायता करना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि मानवता किसी पद, प्रतिष्ठा या पहचान की मोहताज नहीं होती। घायल व्यक्ति अपना हो या अनजान, संकट की घड़ी में उसकी सहायता करना ही सबसे बड़ा मानवीय धर्म है। संगीता लहरे ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यह संदेश दिया कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास की सबसे मजबूत कड़ी संवेदनशील व्यवहार और समय पर मिलने वाली मदद है।
पुलिस अधीक्षक से महिला आरक्षक संगीता लहरे को सम्मानित करने की मांग
महिला आरक्षक संगीता लहरे के इस सराहनीय कार्य को देखते हुए जिला जांजगीर-चांपा के पुलिस अधीक्षक से मांग है कि वे स्वयं इस घटना का संज्ञान लें और महिला आरक्षक के मानवीय योगदान की विभागीय स्तर पर सराहना करें। उन्हें प्रशस्ति पत्र, सम्मान समारोह अथवा उचित प्रोत्साहन प्रदान किया जाना चाहिए।
ऐसे पुलिसकर्मी सम्मान के वास्तविक हकदार हैं, जो अपनी निर्धारित ड्यूटी के साथ-साथ मानवता के प्रति भी पूरी निष्ठा रखते हैं। यदि विभाग ऐसे कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करता है, तो इससे अन्य पुलिसकर्मियों को भी आम नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा मिलेगी।
शासन-प्रशासन के लिए एक सकारात्मक संदेश
यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना की खबर नहीं है, बल्कि पुलिसिंग के मानवीय चेहरे की एक प्रेरक तस्वीर भी है। एक ओर घायल भाई-बहन के साथ हुई दुर्घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार चालक पर वैधानिक कार्रवाई जरूरी है, वहीं दूसरी ओर संगीता लहरे जैसे संवेदनशील पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करना भी उतना ही आवश्यक है।
प्रशासन को यह समझना होगा कि कानून का राज तभी मजबूत होता है, जब कार्रवाई में निष्पक्षता और वर्दी में संवेदनशीलता दिखाई देती है। दुर्घटना के जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई हो और मानवता की मिसाल पेश करने वाली महिला आरक्षक को सम्मान मिले, यही इस घटना से जुड़ी जनभावना है।
संगीता लहरे ने यह साबित किया है कि पुलिस की असली पहचान केवल अपराधियों पर कार्रवाई करने से नहीं, बल्कि मुसीबत में फंसे लोगों के लिए मदद का हाथ बढ़ाने से भी बनती है। ऐसे कर्मठ और संवेदनशील पुलिसकर्मी ही पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं और आम जनता के दिलों में विश्वास पैदा करते हैं।







