नारायणपुर संवाददाता – जितेन्द्र बिरंवार
नारायणपुर के बदहाल मसपुर बालक आश्रम में आदिवासी बच्चे दयनीय हालत में हैं.
नारायणपुर: नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर ओरछा विकासखंड में स्थित नक्सल प्रभावित गांव मसपुर के बालक आश्रम में चारों तरफ बदहाली छाई हुई है. आश्रम का पुराना जर्जर भवन, बारिश में टपकती छत, गीला फर्श, फटे गद्दे, गंदी चादरें, फटी मच्छरदानियां और शाम होने पर अंधेरे के बीच आदिवासी बच्चे जीवन बसर कर रहे हैं.
बालक आश्रम परिसर में घूम रहे जानवर: आश्रम परिसर की बाउंड्रीवाल अधूरी है, जिसके चलते सुअर और अन्य जानवर खुलेआम परिसर में घूमते हैं. जिससे बच्चों में संक्रमण का खतरा बना हुआ है.

नक्सलगढ़ के बालक आश्रम का हाल
बालक आश्रम में जगह जगह पानी: आश्रम के अंदर जाने पर पहला कमरा क्लास रूम है, जहां फर्श में पानी पड़ा हुआ था. जिससे बच्चों के बैठने के लिए बिछाई गई चटाइयां एक किनारे में रखी हुई थी. ब्लैक बोर्ड पर भी पानी गिर रहा था. आश्रम में दो टीचर पदस्थ हैं, लेकिन मौके पर एक भी नहीं मिला. आश्रम में काम करने वाले कर्मचारी हड़वे राम ने बताया कि दोनों टीचर एक दिन पहले नारायणपुर गए थे, जो वापस नहीं लौटे. इस दौरान बच्चों की जिम्मेदारी उस कर्मचारी के हाथों में थी.

मसपुर बालक आश्रम में इस समय है 20 आदिवासी बच्चे
एक सर नारायणपुर गए हैं, दूसरे सर भी नारायणपुर गए हैं. एक सर मीटिंग में जा रहा हूं बोल कर गए हैं. दूसरे सर बताए नहीं किस काम से गए हैं- हड़वे राम, आश्रम का कर्मचारी
फटे गद्दे में सो रहे बच्चे, रात में रहता है अंधेरा: क्लासरूम के बाद पहुंचा, जहां बच्चों के लिए बेड लगाए गए थे. अंदर जाने पर गीली फर्श, सीलन भरी दीवारें, छत से टपकता पानी, टपकते पानी को स्टोर करने कमरे में जगह जगह छोटी बाल्टी और मग रखा हुआ था. बच्चों के बेड पर लगाए गए गद्दे फटे हुए थे. उन पर बिछाई गई चादरें काफी मैली थी. इसी बिस्तर पर बच्चे सोते हैं. बच्चों को जो मच्छरदानियां दी गई हैं, वे फटी हुई हैं, जिनसे मच्छरों से बचाव संभव नहीं. कई बच्चे सर्दी खांसी से पीड़ित हैं.आपकों बता दें कि इस आश्रम में बिजली नहीं है. रात में वैकल्पिक व्यवस्था या चार्जिंग लाइट जलाई जाती है. इसके अलावा टॉयलेट निर्माणाधीन है, जिससे बच्चों दिन हो या रात शौच के लिए आश्रम से बाहर जाना पड़ता है.

मसपुर बालक आश्रम में अव्यवस्था
बदहाल मसपुर बालक आश्रम
यही व्यवस्था है. पिछले साल ही गद्दा लाए थे. शौचालय के लिए बच्चे बाहर जाते हैं. जंगली जानवर का खतरा बना रहता है. हम मांग कर चुके हैं, लेकिन अबतक व्यवस्था नहीं हो पाई है-राजू, ग्रामीण
गद्दा खराब है. छत टपकती है. नई वाली सीट है, फिर भी पानी टपकता है – हड़वे राम, आश्रम का कर्मचारी
मसपुर बालक आश्रम कब बना: मसपुर बालक आश्रम भवन को लगभग 30 साल पहले बनाया गया था. आदिम जाति कल्याण विभाग की तरफ से संचालित इस बालक आश्रम की स्थापना 1995 में हुई. आश्रम की क्षमता 50 सीटर की है. लेकिन फिलहाल यहां मसपुर और उसके आसपास के दूरस्थ अंचल के 20 लड़के आश्रम में रह रहे हैं, लेकिन यहां के हालात बहुत खराब हैं.

बालक आश्रम में भरा पानी
नियद नेल्लानार योजना के तहत बना पुलिस कैंप: अबूझमाड़ का आदिवासी बहुल गांव मसपुर नक्सल प्रभावित गांव है. इस गांव में लगभग 35 परिवार बसते हैं. अक्टूबर 2024 में नियद नेल्लानार योजना के तहत मसपुर में पुलिस कैंप बनाया गया. दरअसल नियद नेल्लानार योजना के तहत नक्सल प्रभावित गांवों में सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. इस कैंप के 5 किलोमीटर दायरे में आने वाले गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल की व्यवस्था कराई जा रही है, लेकिन ग्रामीण कहते हैं कि मसपुर के हालात आज भी नहीं बदले हैं.
बालक आश्रम परिसर में घूम रहे सुअर
ग्रामीण बताते हैं कि कैंप की स्थापना के महीनेभर बाद 9 नवंबर 2024 को छत्तीसगढ़ की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक मसपुर पहुंचीं. उन्होंने यहां ग्रामीणों से बात कर समस्याओं की जानकारी ली. ग्रामीणों ने उस दौरान आश्रम शाला की दिक्कतों से भी उन्हें अवगत कराया था. जिसपर समस्या निराकरण का भरोसा प्रमुख सचिव ने दिया था. प्रमुख सचिव के दौरे को लगभग 8 महीने बीत चुके हैं लेकिन मसपुर के बालक आश्रम की स्थिति वैसी ही बदहाल है.
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग राजेंद्र सिंह ने बताया कि क्षेत्र में पूर्व में नक्सली प्रभाव के चलते विकास कार्य बाधित थे, लेकिन अब नए भवन की स्वीकृति दी जा चुकी है. तेज बारिश के चलते काम प्रभावित हुआ है, लेकिन जल्द सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
बालक आश्रम में बिजली भी नहीं, रात में अंधेरे में रहते हैं बच्चे
कलेक्टर ने दिया आश्रम भवन का काम जल्द पूरा करने का भरोसा: नारायणपुर कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगई से बालक आश्रम की बदहाली और समस्या के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया “मसपुर के हॉस्टल के लिए एक बड़ा हॉल स्वीकृत किया है. टेंडर प्रोसेस में है. वहां कुछ काम चल रहा था, जैसे बाउंड्रीवॉल का काम लेकिन मौसम की वजह से बीच में काम प्रभावित हुआ. हम कोशिश करेंगे कि सिविल वर्क जल्द से जल्द पूरा हो जाए.”
आपने संज्ञान में लाया है. यदि बच्चों को कोई समस्या है तो एसी ट्रायबल एक बार देखकर आएंगे और हम कोशिश करेंगे कि मसपुर हॉस्टल में जितनी भी समस्या है, उसका जल्द से जल्द निराकरण करें- प्रतिष्ठा ममगई, कलेक्टर, नारायणपुर
मसपुर बालक आश्रम शाला की बदहाल स्थिति शासन प्रशासन की उन योजनाओं पर सवाल खड़े करती है, जिनका उद्देश्य आदिवासी बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षा का वातावरण उपलब्ध कराना है. टपकती छतों और फटे गद्दों के बीच मासूम बच्चों की उम्मीदें अब भी शासन के सहयोग की ओर टकटकी लगाए हुए हैं







